नई दिल्ली: किसी भी विमान दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाती है। प्रारंभिक रिपोर्टों में अक्सर तकनीकी खराबी या मौसम को मुख्य कारण माना जाता है। कई मामलों में पायलट को संकरे रनवे या खराब मौसम के कारण इमरजेंसी लैंडिंग की अनुमति लेनी पड़ती है, लेकिन लैंडिंग के दौरान संतुलन बिगड़ने से हादसा हो सकता है।
यूरोपियन ट्रांसपोर्ट सेफ्टी काउंसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में लगभग 90 प्रतिशत विमान हादसों की बड़ी वजह तकनीकी खामियां होती हैं। इसके साथ ही खराब मौसम, तेज़ हवा, कम दृश्यता और रनवे की स्थिति भी दुर्घटनाओं में अहम भूमिका निभाती है।
टेकऑफ और लैंडिंग सबसे जोखिम भरे चरण
एविएशन सेफ्टी विशेषज्ञों के अनुसार, विमान उड़ान भरते समय और उतरते समय सबसे अधिक दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। वर्ष 2023 में दर्ज हुई कुल दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान हुई। इन चरणों में इंजन फेल होने, ब्रेक सिस्टम में गड़बड़ी या कंट्रोल लॉस जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं।
पायलट की चूक भी बन सकती है कारण
कई रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि मानव त्रुटि यानी पायलट की गलती विमान दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण होती है। सुरक्षित उड़ान के लिए पायलट को मौसम की सही जानकारी, उड़ान की योजना और विमान के तकनीकी पहलुओं पर पूरी पकड़ होना जरूरी है। खराब मौसम का गलत आकलन, देर से लिया गया निर्णय या आपात स्थिति में संतुलन न बना पाना हादसे की वजह बन सकता है।
इसलिए किसी भी विमान दुर्घटना के पीछे आमतौर पर तकनीकी खामी, मौसम की खराब स्थिति और मानवीय त्रुटि—तीनों कारक जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनकी पुष्टि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होती है।