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सुबह के दर्द और जकड़न के पीछे की वजह
जब हम सोते हैं, तो हमारा शरीर लंबे समय तक निष्क्रिय रहता है। इस दौरान जोड़ों के बीच मौजूद सिनोवियल फ्लूइड, जो लुब्रिकेंट या ‘ग्रीस’ का काम करता है, गाढ़ा हो जाता है। स्वस्थ शरीर में हलचल शुरू होते ही यह वापस सामान्य हो जाता है, लेकिन अगर जोड़ों में सूजन हो, तो यह जकड़न घंटों बनी रहती है।
जकड़न के मुख्य कारण
कम तापमान: रात में तापमान गिरने से जोड़ों के टिश्यू थोड़े फैलते हैं, जिससे दबाव बढ़ता है।
गलत पोस्चर: गलत तरीके से सोने से मांसपेशियों में खिंचाव और जोड़ों पर तनाव बढ़ता है।
उम्र का बढ़ना: उम्र के साथ कार्टिलेज घिसने लगता है, जिससे हड्डियां आपस में रगड़ खाती हैं।
कहीं आप इन बीमारियों के शिकार तो नहीं?
1. रुमेटाइड अर्थराइटिस
यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम ही जोड़ों पर हमला कर देता है। इसमें जकड़न के साथ-साथ जोड़ों में सूजन और रेडनेस भी देखी जाती है। यह अक्सर हाथों और पैरों के छोटे जोड़ों से शुरू होता है।
2. ऑस्टियोआर्थराइटिस
इसे ‘वियर एंड टियर’ अर्थराइटिस भी कहते हैं। यह आमतौर पर घुटनों, कूल्हों और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। इसमें जकड़न आमतौर पर उठने के 15-20 मिनट के भीतर कम हो जाती है।
3. फाइब्रोमायल्गिया
अगर जकड़न के साथ पूरे शरीर में दर्द, थकान और नींद न आने की समस्या है, तो यह फाइब्रोमायल्गिया हो सकता है। इसमें मांसपेशियों के ‘टेंडर पॉइंट्स’ पर हल्का दबाव देने पर भी तेज दर्द होता है।
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राहत पाने के प्रभावी उपाय
हल्की स्ट्रेचिंग
बिस्तर छोड़ने से पहले बेड पर ही उंगलियों और पैरों को धीरे-धीरे हिलाएं। इससे ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है।
गर्म सिकाई
गरम पानी से नहाना या हीटिंग पैड का इस्तेमाल मांसपेशियों को ढीला करता है।
एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट
हल्दी, अदरक, अखरोट, अलसी और विटामिन D से भरपूर भोजन सूजन कम करते हैं।
हाइड्रेशन
भरपूर पानी पिएं। शरीर में पानी की कमी जोड़ों के लुब्रिकेशन को प्रभावित करती है।