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दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने मंगलवार को एक नया सर्कुलर जारी करते हुए सभी मान्यता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त (बिना सरकारी सहायता वाले) निजी स्कूलों के लिए सूचना साझा करने के प्रारूप में बदलाव किया है। नए निर्देशों के तहत अब निजी स्कूलों को फीस बढ़ोतरी सहित अन्य आवश्यक जानकारियां निर्धारित नए प्रारूप में शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करानी होंगी। निदेशालय इन जानकारियों की जांच करेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फीस वृद्धि और अन्य प्रशासनिक निर्णय निर्धारित नियमों के अनुरूप हैं।
शिक्षा निदेशालय ने नए प्रारूप में निजी स्कूलों से टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी मांगी है। इसके तहत स्कूलों को स्वीकृत कुल पदों, वर्तमान में भरे हुए पदों और शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता का पूरा विवरण उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा स्कूलों को छात्र-शिक्षक अनुपात (Student-Teacher Ratio) की जानकारी भी देनी होगी। साथ ही कक्षा और श्रेणीवार छात्रों के दाखिले का विस्तृत ब्यौरा भी शिक्षा निदेशालय को सौंपना अनिवार्य होगा।
निजी स्कूलों के लिए ये जानकारियां देना होगा अनिवार्य
शिक्षा निदेशालय के नए निर्देशों के तहत सभी मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को कई महत्वपूर्ण जानकारियां अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होंगी। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत हुए दाखिलों और स्कूल के कुल नामांकन का विस्तृत विवरण। ट्यूशन फीस के साथ अन्य सभी शुल्क, फीस में की गई बढ़ोतरी तथा स्कूल के वित्तीय खातों का पूरा ब्यौरा। स्कूल के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) की स्थिति और सरकार द्वारा जारी विभिन्न आदेशों एवं नियमों के अनुपालन से संबंधित जानकारी।
18 मानकों पर बतानी होगी फीस बढ़ाने की वजह
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि अब निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को फीस बढ़ोतरी के हर प्रस्ताव को 18 निर्धारित मानकों के आधार पर उचित ठहराना होगा। साथ ही उन्हें अभिभावकों को यह भी संतुष्ट करना होगा कि प्रस्तावित शुल्क वृद्धि वास्तव में आवश्यक और न्यायसंगत है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार ने सभी निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को 15 जुलाई तक दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के तहत स्कूल स्तरीय शुल्क विनियमन समिति (School Level Fee Regulation Committee-SLFRC) का गठन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा तक नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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शिक्षा मंत्री के अनुसार, फीस में बदलाव का प्रस्ताव रखने वाले स्कूलों को पहले इसे समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद उन्हें 18 तय मानकों के आधार पर यह साबित करना होगा कि शुल्क वृद्धि क्यों जरूरी है। इन मानकों में बुनियादी ढांचे का विकास, परिवहन सुविधाएं, स्कूल भवन, सुरक्षा व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, कर्मचारियों की भर्ती तथा अन्य संस्थागत खर्च शामिल हैं। आशीष सूद ने कहा कि स्कूलों को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रस्तावित फीस वृद्धि वास्तविक विकास कार्यों और सुविधाओं में सुधार से जुड़ी है। साथ ही, इसके समर्थन में वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे, ताकि शुल्क वृद्धि की पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित की जा सके।