भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ने नौसेना के लिए विकसित स्वदेशी जीसैट आर उपग्रह को सफलता पूर्वक लान्च किया है. इस अत्याधुनिक संचार उपग्रह से नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. इस उपग्रह से समद्र मे नौसेना की नेटवर्क केंद्रित युद्धक क्षमताओं में इजाफा होगा. यह नौसेना की संचार और निगरानी क्षमताओं को नए स्तर पर ले जाएगा. यह नौसेना के लिए लॉन्च किया गया सबसे उन्नत संचार उपग्रह है. पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और विकसित यह उपग्रह 4,400 किलोग्राम वजनी है.
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नौसेना के लिए कितना कारगर
यह उपग्रह अब तक का भारत का सबसे भारी संचार उपग्रह है. इसमें कई ऐसे अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकी सामग्री लगी है जिसे नौसेना की ऑपरेशन और सामरिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है. यह नौसेना को महासागर में विस्तृत और मजबूत दूरसंचार कवरेज प्रदान करेगा. इसके पोलोड में ऐसे ट्रांसपोंडर लगे हैं, जो विभिन्न संचार बैंड्स को ध्वनि, डेटा और वीडियो लिंक की सुविधा उपलब्ध कराएंगे.
रणनीतिक क्षमताओं में बढ़ोतरी
यह सैटेलाइट नौसेना के युद्धपोतों, विमानों , पनडुब्बियों औस समुद्री संचालन केन्द्रों को हाई लेवल बैंडविड्थ के माध्यम से बिना किसी रुकावट के सुरक्षित और विश्वासनीय संचार सुनिश्चित करेगा. इससे नौसेना की समुद्री डोमेन जागरूकता और रणनीतिक क्षमताओं में बढ़ोतरी होगी सच कहें तो मौजूदा समय में जटिल सुरक्षा चुनौतियो के बीच जीसैट- 7 आर भारतीय नौसेना के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है.
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आत्मनिर्भर भारत का उदाहरण
आत्मनिर्भर भारत की भावना को साकार करते हुए उन्नत अंतरिक्ष प्रौधोगिकी के माध्यम से देश के समुद्री हितों की रक्षा के लिये निरंतर तत्पर है. हिंद महासागर में जिस में चीन और पाकिस्तान की जिस तरह चुनौतियों मिल रही है उसके मद्देनजर यह उपग्रह काफी मायने रखता है. समंदर में सारे युद्धपोतों के बीच समन्वय, सही हालात की रियल टाइम में जानकारी और सभी संभावित खतरों का जवाब भी तुरंत जवाब दिया जा सकता है.