हेल्दी समझकर रोज खाते हैं ये 6 चीजें, लेकिन दिल की सेहत को चुपके से पहुंचाती हैं नुकसान
इन फील्ड में करियर बनाना होगा सेव
इसी के बीच, एक जरूरी बात सामने आती है. कुछ प्रोफेशन इसलिए मजबूत बने रहते हैं क्योंकि उनमें खास तौर पर इंसानी गुणों, सहानुभूति, इंट्यूशन, जजमेंट और क्रिएटिविटी की जरूरत होती है. IDP की AI-सेफ डिग्रीज़ अब्रॉड रिपोर्ट के अनुसार, ये ह्यूमन-सेंटर्ड करियर न केवल ऑटोमेशन से सुरक्षा देते हैं बल्कि फाइनेंशियल सिक्योरिटी भी देते हैं.
जीरो AI रिस्क वाली नौकरी
विदेश में पढ़ने की इच्छा रखने वाले भारतीय स्टूडेंट्स के लिए, ये जानकारी बहुत ज़रूरी है. अकेले 2025 में, लगभग 15 लाख स्टूडेंट्स ने क्लास 12 CBSE एग्जाम पास किए, जबकि भारत की 1,168 यूनिवर्सिटी और 45,473 कॉलेज इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. रिपोर्ट में उन प्रोफेशन के बारे में बताया गया है जहां इंसानी टच बहुत ज़रूरी है. इन रोल में अच्छी सैलरी, ग्रोथ और ऑटोमेशन का लगभग ज़ीरो रिस्क मिलता है.हम आपको बता रहे हैं AI-सेफ करियर के बारे में.
87 की उम्र में भी फर्राटा! ‘बाइकर दादी’ मंडाकिनी शाह की शोले-स्टाइल स्कूटी राइड बनी चर्चा का विषय
- Physician Assistant (चिकित्सक सहायक)
- Nurse Practitioner (नर्स प्रैक्टिशनर)
- Physicist (भौतिक विज्ञानी)
- General Dentist (डेंटिस्ट)
- Nurse Midwife (नर्स मिडवाइफ)
- Urologist (यूरोलॉजिस्ट)
- Nurse Anesthetist (नर्स एनेस्थेटिस्ट)
इन करियर में नंबरों से ज़्यादा कुछ है, इनमें ऐसी क्वालिटीज़ की ज़रूरत होती है जिन्हें एल्गोरिदम कॉपी नहीं कर सकते. मोरल डीसीजन, हमदर्दी, प्रॉब्लम-सॉल्विंग, और अचानक आई इंसानी ज़रूरतों पर रिस्पॉन्ड करने की क्षमता.