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कुछ लोगों में गेहूं या ग्लूटेन से आंत की परत में जलन हो सकती है, जिससे आंत लीक हो सकती है और आंशिक रूप से पचा हुआ भोजन रक्त में जा सकता है. इससे इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाती है और सूजन पैदा होती है. जैसे सिंथेटिक स्वीटनर, संशोधित स्टार्च और तेल, ये शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ाते हैं और सूजन को बढ़ावा देते हैं. ऐसे में नेचुरल और फ्रेश खाना खाएं, प्रोसेस्ड फूड से बचें.
लगातार तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है. कोर्टिसोल सूजन को कंट्रोल करता है, लेकिन इसकी कमी या असंतुलन से शरीर की सूजन बढ़ जाती है. लंबे समय तक कम चलना, पुराने घाव और चोटें भी सूजन बढ़ा सकती हैं. इसलिए रोज एक्सरसाइज करें, स्ट्रेस कम करने के लिए ध्यान और योग अपनाएं.
कुछ वायरस शरीर में निष्क्रिय रहते हैं और कभी-कभी सक्रिय होकर सूजन पैदा करते हैं. तनाव और विटामिन डी की कमी इम्यून सिस्टम को कमजोर करके वायरस को सक्रिय कर सकते हैं. ऐसे में पूरी नींद, बैलेंस डाइट और विटामिन डी की सही मात्रा लें.
ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली डाइट लेने से इंसुलिन की प्रतिक्रिया कमजोर हो जाती है. इससे ब्लड में ग्लूकोज बढ़ता है और फैट टिशू में सूजन होती है. शरीर में ज्यादा आयरन ऑक्सीडेटिव तनाव बढ़ाता है, जिससे लीवर और जोड़ों में सूजन हो सकती है. इसलिए बैलेंस डाइट लें, कार्बोहाइड्रेट और मीठे पेय पदार्थों का सेवन कंट्रोल करें.
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अगर लीवर में पित्त सही तरीके से नहीं बनता या बहता, तो सूजन बढ़ सकती है और दर्द कंधे या पीठ में महसूस हो सकता है. स्वीट ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड फूड ज्यादा लेने से यूरिक एसिड बढ़ता है, जो जोड़ों और रक्त वाहिकाओं में सूजन पैदा करता है. ऐसे में हरी सब्जियां, कम तली हुई चीज़ें और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं.
सूजन कम करने के लिए केफिर, किमची, साउरक्रॉट जैसे फूड्स आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं और सूजन कम करते हैं. ओमेगा-3 फैटी एसिड, कॉड लिवर ऑयल, सार्डिन और सैल्मन में पाए जाने वाले ओमेगा-3 हार्ट और जोड़ों की सूजन कम करते हैं. फूलगोभी, ब्रोकोली और केल, ये सब्जियां लिवर को मदद करती हैं और सूजनरोधी गुण रखती हैं. पाचन को आराम देता है, इंसुलिन स्तर कम करता है. साथ ही ठंडे पानी या बर्फ के पैक से सूजन और दर्द में आराम मिलता है.