Kota Gharial Sanctuary Update: राजस्थान के कोटा शहर में चंबल किनारे बसे परिवारों के लिए नया साल खुशियों की सौगात लेकर आया है. आज सालों का इंतजार खत्म हो गया है और हैंगिंग ब्रिज से कोटा बैराज तक का करीब 732 हेक्टेयर इलाका चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य की पाबंदियों से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रयासों के बाद राजस्थान सरकार ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है.
अगर आपका घर भी चंबल किनारे इन इलाकों में आता है, तो अब आपके लिए ये काम आसान हो जाएंगे:-
सालों से अटके हुए मकानों और दुकानों के पट्टे अब प्रशासन जारी कर सकेगा.
जमीन बेचने और खरीदने पर लगी कानूनी रोक हट जाएगी.
नए मकान बनाने या पुराने घर की मरम्मत (जीर्णोद्धार) के लिए अब वन विभाग से चक्कर नहीं काटने होंगे.
सड़क, नाली और बिजली जैसे सरकारी विकास कार्य अब बिना किसी एनओसी (NOC) के तेजी से हो सकेंगे.
कैसे मिली यह सफलता?
चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य होने के कारण नदी किनारे के 1 किलोमीटर के दायरे को ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ घोषित किया गया था. स्पीकर ओम बिरला ने इस समस्या को केंद्र सरकार और नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ (NBWL) के सामने रखा. केंद्र से मंजूरी मिलने के बाद 23 दिसंबर 2025 को राज्यपाल ने भी इसे हरी झंडी दे दी, जिसके बाद अब आधिकारिक आदेश जारी हो गए हैं.
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