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मंकी फीवर आखिर फैलता कैसे है?
मंकी फीवर सीधे बंदरों से इंसानों में नहीं फैलता. यह बीमारी एक खास किस्म के जंगली टिक हेमाफिसैलिस स्पिनिगेरा के जरिए फैलती है. इसके अलावा गिलहरी और चूहे जैसे जानवर भी इंफेक्शन के सोर्स हो सकते हैं. इंसान में इंफेक्शन तब होता है, जब, टिक काट ले या फिर आप बीमार या मरे हुए संक्रमित बंदरों के संपर्क में आया जाए. अच्छी बात यह है कि यह बीमारी इंसान से इंसान में नहीं फैलती. आमतौर पर इसके मामले अक्टूबर-नवंबर से शुरू होते हैं और जनवरी से अप्रैल के बीच सबसे ज्यादा देखे जाते हैं.
किन वजहों से बढ़ता है खतरा?
डॉक्टर के अनुसार, बिना सुरक्षा के जानवरों को संभालना, जंगलों में जाना, या उन इलाकों में रहना जहां इंफेक्टेड बंदरों की मौत हुई हो, इन सब से केएफडी का खतरा बढ़ जाता है.
मंकी फीवर के लक्षण क्या हैं?
KFD के लक्षण आमतौर पर 3 से 8 दिन के भीतर दिखने लगते हैं. शुरुआत तेज ठंड लगने और तेज सिरदर्द से होती है. इसके बाद-
- नाक, गले और मसूड़ों से खून आना
- लो ब्लड प्रेशर
- प्लेटलेट और ब्लड काउंट कम होना
कुछ मामलों में न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिख सकते हैं, जैसे कि-
- उल्टी और मितली
- मांसपेशियों में जकड़न
- मानसिक भ्रम
- कंपकंपी
- नजर कमजोर होना
- तेज सिरदर्द और रिफ्लेक्स कम होना
कितना जानलेवा है केडीके?
इस बीमारी में मृत्यु दर 2 से 10 प्रतिशत के बीच मानी जाती है, जो इस बात पर निर्भर करती है कि बीमारी कितनी जल्दी पकड़ी गई और इलाज कितनी जल्दी शुरू हुआ. सही समय पर इलाज मिलने पर ज्यादातर मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं.
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बचाव ही सबसे बड़ा इलाज
फिलहाल मंकी फीवर का कोई खास इलाज नहीं है. इलाज में मरीज को आईवी फ्लूइड दिए जाते हैं, खून बहने की स्थिति को संभाला जाता है और पूरी तरह आराम की सलाह दी जाती है. प्रोटीन से भरपूर आहार और पर्याप्त पानी पीना भी फायदेमंद माना जाता है.