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कौन हैं मतिल्दा कुल्लू?
मतिल्दा कुल्लू ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के गरगड़बहाल गांव से हैं। यहां वे पिछले लगभग 15 वर्षों से आशा वर्कर के रूप में काम कर रही हैं। उनके पोर्टफोलियो में ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता, माताओं और नवजातों की देखभाल, टीकाकरण, पोषण सलाह और कोविड-19 जैसे गंभीर स्वास्थ्य संकट के दौरान कोविड जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं। 45 वर्ष की उम्र में मातिल्दा ने अपने गांव के लगभग 964 लोगों की स्वास्थ्य सेवा में समर्पित जीवन देते हुए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी।
आशा वर्कर के रूप में उनकी सेवा और संघर्ष
वर्ष 2005 में उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत ASHA (Accredited Social Health Activist) वर्कर के रूप में नियुक्त किया गया। उस समय गांव में लोग बीमारी होने पर डॉक्टर के पास नहीं जाते थे और आस-पास के जादू-टोना या काले जादू जैसे प्रथाओं पर भरोसा करते थे। मतिल्दा ने वर्षों तक घर-घर जाकर लोगों को सही उपचार, सफाई, टीकाकरण और चिकित्सा के बारे में समझाया। इस दौरान उन्होंने जातिवाद और अंधविश्वास से भी लगातार जूझा और लोगों के मन में विश्वास जगाया कि डॉक्टर के पास जाना और मेडिकल इलाज लेना जरूरी है।
कोविड 19 के दौरीन चुनौती बढ़ी
उनका दिन सुबह सुबह पाँच बजे शुरू होता है। वह घर के सभी काम निपटाकर साइकिल पर बैठकर 50-60 घरों तक रोज फेस-टू-फेस हेल्थ विज़िट करती हैं, खासकर कोविड-19 के दौरान यह काम और भी चुनौतीपूर्ण रहा। मतिल्दा को केवल सेवा का जुनून मिला, लेकिन आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं रही। उन्हें लगभग 4,500 रुपये प्रति माह की मामूली आय मिलती है। बावजूद इसके उन्होंने निस्वार्थ सेवा जारी रखी और सफलता की ऊँचाइयों को छुआ।
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मतिल्दा कुल्लू की उपलब्धियां
- Forbes India W-Power 2021 में चयन
मतिल्दा कुल्लू वह पहली आशा वर्कर हैं जिनका नाम फोब्स इंडिया डब्ल्यू पावर 2021 लिस्ट में शामिल किया गया। यह एक ऐसी प्रतिष्ठित सूची है जिसमें देश की प्रभावशाली महिलाओं का सम्मान किया जाता है। इसके साथ ही उनका नाम बैंकिंग जगत की दिग्गज अरुंधति भट्टाचार्य और बॉलीवुड अभिनेत्री जैसे नामों के साथ शामिल हुआ।
- कोविड-19 के दौरान बहादुरी और समाज सेवा
कोरोना महामारी के दौरान भी वे बिना सुरक्षा उपकरणों के गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करती रहीं, कोविड-19 लक्षणों वाले लोगों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में मदद करती रहीं।
- स्वास्थ्य जागरूकता और बदलाव
आज उनके गांव में 100% कोविड-19 वैक्सीनेशन, बेहतर मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाएं और अस्पताल के प्रति जागरूकता देखने को मिलती है। यह सब उनके वर्षों के कठिन परिश्रम का परिणाम है।