पोस्टमार्टम और एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की रिपोर्ट में सामने आया कि धार्मिक कथावाचक अस्थमा और फेफड़ों की अन्य समस्याओं से पीड़ित थीं। अस्थमा की वजह से उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ। पुलिस ने कहा कि सभी मेडिकल रिपोर्टों की जांच और डॉक्टरों से चर्चा के बाद मामले में किसी तरह की साजिश या संदिग्ध बात सामने नहीं आई है। 28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई, जिसके बाद इलाके में हंगामा मच गया। परिवार का कहना था कि वह कुछ दिनों से बीमार थीं। इसी दौरान एक अनजान व्यक्ति ने उन्हें इंजेक्शन लेने के लिए आश्रम में बुलाया था।
पोस्ट के कैप्शन में लिखा था, “मैंने अपने जीवन का हर पल सनातन धर्म के प्रचार के लिए समर्पित किया है। पूरी जिंदगी मुझे आदि जगद्गुरु शंकराचार्य, योग गुरुओं और पूज्य संतों-ऋषियों का आशीर्वाद मिला। मैंने आदि गुरु शंकराचार्य और देश के कई महान संतों को पत्र लिखकर अग्नि परीक्षा की मांग भी की, लेकिन ईश्वर की इच्छा कुछ और थी।”
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आगे लिखा था, “मैं इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह रही हूं। मुझे भगवान और पूज्य संतों-ऋषियों पर पूरा विश्वास है। अगर मुझे इस जीवन में न्याय नहीं मिला, तो मृत्यु के बाद जरूर ) मिलेगा।” उनकी मौत के बाद राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सांसद ने मामले की जांच CBI से कराने की मांग की।