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भारत की पहली महिला जिनकी टाइगर कंजर्वेशन में Ph.D.
डॉ. लतिका नाथ ने बाघों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास पर गहन शोध किया। वे टाइगर कंजर्वेशन में पीएचडी करने वाली पहली महिला हैं। उनका काम केवल अकादमिक शोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने जंगलों में रहकर बाघों के व्यवहार, उनके संघर्ष और मानव-वन्यजीव संबंधों को गहराई से समझा।
क्यों कहा जाता है ‘Tiger Princess’?
डॉ. लतिका नाथ को भारत की ‘टाइगर प्रिंसेस’ कहा जाता है। उनकी बाघों के प्रति गहरी लगन और समर्पण पर एक विशेष डॉक्यूमेंट्री भी बनी थी, जिसे नेशनल ज्योग्राफिक ने प्रस्तुत किया। इस डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने बाघों की शानदार भव्यता और उनकी जंगली आज़ादी के प्रति अपने प्रेम को साझा किया। वे कहती हैं:
“कुछ इतना खूबसूरत, इतना अनछुआ और जंगली रूप में प्रकृति में मौजूद हो—यही रोमांच मुझे बाघों से प्यार करने पर मजबूर करता है।”
जंगलों से महासागरों और ध्रुवीय क्षेत्रों तक का सफर
डॉ. लतिका नाथ केवल बाघों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने जंगलों, महासागरों और ध्रुवीय क्षेत्रों की यात्राएं कीं, ताकि यह समझ सकें कि पृथ्वी पर जीवन एक-दूसरे से कैसे जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, हर प्रजाति, हर आवास और हर इंसान एक अदृश्य धागे से बंधा है। यही सोच उनकी संरक्षण की फिलोसफी को खास बनाती है।
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वन्यजीव फोटोग्राफर और स्टोरीटेलर
डॉ. लतिका नाथ खुद को “स्टोरीटेलर ऑफ द वाइल्ड” कहती हैं। वे अपनी फोटोग्राफी और लेखन के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश करती हैं कि प्रकृति की रक्षा क्यों जरूरी है। उनकी तस्वीरें केवल जानवरों की सुंदरता नहीं दिखातीं, बल्कि उनके अस्तित्व के संघर्ष को भी सामने लाती हैं।