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पैराट्रूपर्स और अपाचे बने दुश्मन का काल
अभ्यास का आगाज किसी रोमांचक फिल्म की तरह हुआ. आसमान से सैकड़ों पैराट्रूपर्स ने दुश्मन के काल्पनिक ठिकानों पर सटीक लैंडिंग की. जैसे ही उनके पैर जमीन पर पड़े, उन्होंने तुरंत मोर्चा संभाल लिया. इसी बीच,अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों ने अपनी घातक मारक क्षमता का परिचय दिया. कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अपाचे ने दुश्मन के बंकरों पर रॉकेट और मिसाइलें दागकर उन्हें धुएं के गुबार में बदल दिया. हवा में गूंजते धमाके इस बात का सबूत थे कि भारतीय वायुसेना और थल सेना के बीच तालमेल अब नई ऊंचाइयों पर है.
ड्रोन स्वॉर्म और AI का दम
इसी दौरान ड्रोन स्वॉर्म ने एंट्री लेते हुए आसमान में उड़ान भरी. आधुनिक सेंसर और कैमरों से लैस ये ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रखते रहे. रियल टाइम इंटेलिजेंस के जरिए कमांड सेंटर तक सूचनाएं पहुंचाई गईं. सेंसर टू शूटर कॉन्सेप्ट के तहत लक्ष्य की पहचान होते ही फायर यूनिट्स को निर्देश दिए गए. तकनीक और रणनीति का यह तालमेल युद्ध के बदलते स्वरूप को दर्शाता है.
टैंकों और आर्टिलरी की दहाड़
जमीन पर सेना के आधुनिक टैंकों ने अपनी गति और शक्ति का प्रदर्शन किया. रेतीले रेगिस्तान में टैंकों की गर्जना बेहद प्रभावशाली थी. आधुनिक टैंकों ने तेज गति से आगे बढ़ते हुए लक्ष्य पर सटीक गोले दागे. आर्टिलरी यूनिट्स ने लंबी दूरी से सटीक फायर कर दुश्मन की संभावित पोजीशन को ध्वस्त किया. रॉकेट सिस्टम की इंटीग्रेटेड फायरिंग ने युद्धक्षेत्र को नियंत्रित करने की क्षमता का प्रदर्शन किया.
स्वदेशी तकनीक के साथ दिखे सेना के फौलादी इरादे
इस अभ्यास की एक बड़ी विशेषता स्वदेशी तकनीक का उपयोग रहा. लगभग 200 किलो तक का बारूद ले जाने में सक्षम ड्रोन ने ऊंचाई से लक्ष्य भेदा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली और बेहतरीन संचार नेटवर्क ने ऑपरेशन को और अधिक प्रभावी बनाया. कमांड और कंट्रोल सेंटर से हर गतिविधि पर नजर रखी गई, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और सटीक रही.
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भविष्य के युद्ध की रूपरेखा
वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, खड़ग शक्ति 2026 केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध की रूपरेखा है.इसमें संयुक्त ऑपरेशन की ताकत को परखा गया. ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास माना जा रहा है. इस बार की तैयारी पहले से अधिक व्यापक और तकनीक आधारित रही.