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क्या यह सिर्फ शराब पीने की वजह से होता है?
सबसे बड़ा भ्रम यह है कि फैटी लिवर सिर्फ शराब पीने वालों को ही होता है. जबकि सच्चाई यह है कि आज ज्यादातर मामलों में यह नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज के रूप में सामने आता है. इसका मतलब यह है कि जो लोग शराब नहीं पीते, उन्हें भी यह बीमारी हो सकती है. इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा, खराब खानपान और जेनेटिक कारण इसके पीछे अहम भूमिका निभाते हैं. डॉक्टर बताते हैं कि भारत में लगभग 30 से 40 प्रतिशत लोगों में NAFLD पाया जाता है और इनमें से अधिकतर मरीज डायबिटीज, मोटापे या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से भी जूझ रहे होते हैं.
वजन कंट्रोल रहने पर फैटी लिवर नहीं होता
एक और आम धारणा यह है कि अगर व्यक्ति का वजन सामान्य है तो उसे फैटी लिवर नहीं हो सकता. लेकिन डॉक्टर बताते हैं कि कई दुबले दिखने वाले लोगों में भी यह समस्या पाई जाती है, जिसे लीन NAFLD कहा जाता है. असल में शरीर में जमा होने वाला विसरल फैट, जो आंतरिक अंगों के आसपास जमा होता है, बाहर से हमेशा दिखाई नहीं देता.
सबकुछ ठीक मान लेना
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अगर ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम सामान्य आए हैं तो सब ठीक है. लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार शुरुआती चरण में फैटी लिवर के बावजूद ALT और AST जैसे एंजाइम सामान्य रह सकते हैं. इसलिए सिर्फ एक टेस्ट के आधार पर पूरी तरह निश्चिंत होना सही नहीं है.
क्या फैटी लिवर मामूली समस्या है और कभी भी ठीक हो सकता है?
कई लोग सोचते हैं कि फैटी लिवर एक मामूली समस्या है और इसे कभी भी ठीक किया जा सकता है. हालांकि शुरुआती चरण में इसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन अगर लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो यह नॉन-अल्कोहोलिक स्टीटोहेपेटाइटिस , फाइब्रोसिस और आगे चलकर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है. यह लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का कारण भी बन सकता है.
इनको कर देते हैं नजरअंदाज और चीनी जिम्मेदार
फैटी लिवर अक्सर तेज दर्द की बजाय हल्के संकेत देता है, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं. जैसे लगातार थकान, पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन, गर्दन के आसपास त्वचा का काला पड़ना या पेट के आसपास अचानक चर्बी बढ़ना, इस समस्या के पीछे सिर्फ ज्यादा चीनी खाना ही जिम्मेदार नहीं होता. रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव, खराब नींद और अनियमित खानपान भी इसके जोखिम को बढ़ाते हैं.
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ये भी हैं मिथक
फैटी लिवर के इलाज में केवल दवाइयों पर निर्भर रहना भी सही नहीं है. एक्सपर्ट का कहना है कि सबसे प्रभावी उपाय लाइफस्टाइल में बदलाव है. वजन को 7 से 10 प्रतिशत तक कम करना, रेगुलर करना, संतुलित आहार लेना और पर्याप्त नींद लेना लिवर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है.
डॉक्टरों के अनुसार कमर का बढ़ता घेरा, प्रीडायबिटीज, हाई ट्राइग्लिसराइड, कम HDL कोलेस्ट्रॉल और लगातार थकान जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए. समय-समय पर जांच करवाना, प्रोसेस्ड फूड कम करना, रोजाना पैदल चलना और स्वस्थ आदतें अपनाना फैटी लिवर से बचाव में बेहद मददगार हो सकता है.