राजस्थान की राजनीति में आने वाले समय में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले 49 सालों से स्थिर रही विधानसभा सीटों की संख्या में अब भारी इजाफा होने की संभावना है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के अनुसार, आगामी जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद प्रदेश में विधायकों की संख्या 200 से बढ़कर 270 हो सकती है।
जल्द ही देश में जनगणना होने वाली है, जिसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया शुरू होगी। राजस्थान में लगभग 70 नई सीटें जुड़ने की संभावना है। हमने भविष्य को देखते हुए स्ट्रक्चर तैयार कर लिया है, ताकि सदन छोटा न पड़े।
-वासुदेव देवनानी, विधानसभा अध्यक्ष
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राजस्थान में सीटों का गणित: 1952 से अब तक
राजस्थान में आखिरी बार सीटों का विस्तार 1977 में हुआ था। तब से लेकर अब तक जनसंख्या में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन सीटों की संख्या 200 पर ही टिकी रही।
| वर्ष | विधानसभा चुनाव | कुल सीटें | क्या हुआ बदलाव? |
| 1952 | पहला चुनाव | 160 | पहली बार सीटों का निर्धारण |
| 1957 | दूसरा चुनाव | 176 | 16 सीटों की बढ़ोतरी |
| 1967 | विधानसभा चुनाव | 184 | 8 सीटें और बढ़ाई गईं |
| 1977 | विधानसभा चुनाव | 200 | आखिरी बार संख्या में वृद्धि |


