नई दिल्ली : राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में Delhi Police एक अहम कदम उठाने जा रही है। दिल्ली पुलिस जल्द ही शहर का पहला महिला थाना शुरू करने की तैयारी में है। यह थाना एक प्रायोगिक परियोजना (पायलट प्रोजेक्ट) के रूप में शुरू किया जाएगा और इसके अगले कुछ हफ्तों में शुरू होने की संभावना है। इस महिला थाने में महिलाओं के खिलाफ होने वाले सभी प्रकार के अपराधों की सुनवाई की जाएगी। इसमें घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, छेड़छाड़, दहेज उत्पीड़न और स्टॉकिंग जैसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा।
पुलिस अब उत्तरी दिल्ली के सब्जी मंडी पुलिस स्टेशन परिसर में शहर का पहला महिला थाना स्थापित करने की तैयारी में है। इस संबंध में जानकारी रखने वाले तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस थाने में महिलाओं के खिलाफ होने वाले सभी प्रकार के अपराधों से निपटा जाएगा। एक अधिकारी के अनुसार, इस परियोजना पर पिछले कुछ हफ्तों से काम चल रहा है और हाल ही में यह निर्णय लिया गया है कि राजधानी का पहला महिला थाना उत्तरी जिले में ही स्थापित किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल इस थाने को शुरू करने की प्रक्रिया जारी है और इसे जल्द ही संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। यह थाना एक तरह से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कार्य करेगा, जिसकी सफलता के आधार पर भविष्य में अन्य जिलों में भी ऐसे थाने खोले जा सकते हैं।
समर्पित थाने के रूप में करेगा कार्य
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यदि किसी कारणवश सब्जी मंडी स्थित परिसर में कोई समस्या आती है, तो वैकल्पिक तौर पर दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन को भी इस परियोजना के लिए चुना जा सकता है। फिलहाल दोनों विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। अधिकारी के अनुसार, यह थाना पूरी तरह महिलाओं के लिए समर्पित होगा, जहां महिलाओं से संबंधित सभी प्रकार के अपराध दर्ज किए जाएंगे और उनकी जांच की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य पीड़ित महिलाओं को एक सुरक्षित, संवेदनशील और सहज वातावरण उपलब्ध कराना है, ताकि वे बिना झिझक अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।
शिकायतों के जल्दी निपटारे की उम्मीद
अधिकारियों के मुताबिक, महिला अपराधों से जुड़े सभी मामलों को एक समर्पित थाने में लाने से न केवल प्रक्रियाएं सुव्यवस्थित होंगी, बल्कि जवाबदेही भी बढ़ेगी और शिकायतों का त्वरित निपटान सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे पीड़ित महिलाओं को बार-बार अलग-अलग थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। वर्तमान व्यवस्था में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित शिकायतों का निपटारा स्थानीय पुलिस थानों और महिला अपराध प्रकोष्ठ (CAW) के जरिए किया जाता है। हालांकि, इस नई पहल के लागू होने के बाद इन मामलों को एक ही छत के नीचे संभाला जाएगा, जिससे जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
मामले दर्ज और जांच किए जाएंगे
अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में महिला अपराध प्रकोष्ठ (CAW) इकाइयां केवल दहेज उत्पीड़न और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों की जांच कर सकती हैं, लेकिन वे औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं कर सकतीं। इसके विपरीत, नया महिला थाना पूरी तरह सक्षम होगा, जहां शिकायत दर्ज करने से लेकर जांच तक की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह पूरी की जाएगी। नए मॉडल के इस थाने में मारपीट, पीछा करना (स्टॉकिंग), उत्पीड़न जैसे अपराधों के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ होने वाले अन्य गंभीर मामलों की भी जांच की जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेप, छेड़छाड़ और नाबालिग लड़कियों से जुड़े पोक्सो मामलों की सुनवाई भी इसी थाने में की जाएगी।
नियमित थाने की तरह करेगा काम
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस थाने में पूरी तरह महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी और इसकी कमान भी एक महिला अधिकारी के हाथों में होगी। थाने का संचालन एक नियमित पुलिस स्टेशन की तरह किया जाएगा, जहां टीम का नेतृत्व करने के लिए स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) नियुक्त की जाएगी।इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिला शिकायतकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित, संवेदनशील और सुलभ वातावरण तैयार करना है, जहां वे बिना किसी डर या झिझक के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें। अधिकारियों का मानना है कि अक्सर महिलाएं थानों में जाने से हिचकिचाती हैं, ऐसे में यह महिला थाना उनके लिए भरोसेमंद विकल्प साबित होगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति पुलिस की प्रतिक्रिया को और मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। इस थाने के जरिए महिला अपराधों की शिकायत, पंजीकरण और जांच को एक ही जगह केंद्रीकृत किया जाएगा, जिससे मामलों के निपटारे में तेजी और पारदर्शिता आएगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि यह मॉडल पहले से लागू साइबर थाना प्रणाली की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। साइबर थानों को भी शुरुआत में कुछ चुनिंदा जिलों में पायलट आधार पर शुरू किया गया था और उनकी सफलता के बाद पूरे शहर में उनका विस्तार किया गया।
देश के कई राज्यों में ऐसा मॉडल
देश के कई राज्यों में इस तरह की पहल पहले ही लागू की जा चुकी है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। Telangana में महिला सुरक्षा टीमों और समर्पित महिला थानों को रिपोर्टिंग और प्रतिक्रिया समय में सुधार का श्रेय दिया जाता है। वहीं Tamil Nadu में लंबे समय से सभी जिलों में महिला थाने सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा Rajasthan और Uttar Pradesh ने भी पुलिस थानों के भीतर महिला-विशेष इकाइयों की शुरुआत की है, जिससे लिंग आधारित अपराधों से निपटने में मदद मिली है।
दिल्ली में इससे पहले पिंक बूथ जैसी पहल भी की गई थी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात महिला कर्मियों को पर्याप्त अधिकार नहीं मिलने के कारण यह प्रयोग अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका। ऐसे में अब प्रस्तावित महिला थाना एक पूर्ण अधिकार संपन्न पुलिस स्टेशन के रूप में काम करेगा, जहां शिकायत दर्ज करने से लेकर जांच तक की पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।


