Germany Gurdwara Clash: हवा में उछली पगड़ियां, कृपाण से हमला और गोलीबारी—जर्मनी के गुरुद्वारे में हिंसक झड़प, कई घायल
बस एक बार जाना होगा सब-रजिस्ट्रार ऑफिस
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव को कैबिनेट और विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद पूरी प्रक्रिया लगभग पेपरलेस और ऑनलाइन हो जाएगी। नई व्यवस्था के तहत खरीदार और विक्रेता को केवल बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन के लिए ही सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाना होगा। इसके अलावा बाकी सभी प्रक्रियाएं जैसे दस्तावेज अपलोड, सत्यापन और फीस भुगतान ऑनलाइन ही पूरी की जा सकेंगी। सबसे अहम बदलाव यह होगा कि रजिस्ट्रेशन से जुड़े सभी दस्तावेज सीधे DigiLocker ऐप पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे कागजी दस्तावेज रखने की जरूरत कम होगी और प्रक्रिया अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनेगी।
क्या है सरकार का मकसद
एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, यह योजना अगले 5 से 6 महीनों में लागू हो सकती है और फिलहाल इस पर लगातार बैठकें व तकनीकी काम जारी है। नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, ताकि आवेदकों को बार-बार सब-रजिस्ट्रार ऑफिस के चक्कर न लगाने पड़ें। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एप्लिकेशन जमा करने से लेकर ओनरशिप वेरिफिकेशन तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी दस्तावेजों की जांच और फीस भुगतान भी डिजिटल तरीके से किया जाएगा केवल फोटो और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के लिए एक बार सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाना होगा ।
धोखाधड़ी पर रोक लगने की उम्मीद
अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था से प्रॉपर्टी लेन-देन में होने वाली धोखाधड़ी पर रोक लगेगी, क्योंकि पूरा सिस्टम डिजिटल और ट्रैक करने योग्य होगा। नई योजना के तहत एक ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जिससे हर स्टेप आवेदन, दस्तावेज़ सत्यापन और स्वामित्व जांच ऑनलाइन दर्ज और मॉनिटर किया जा सकेगा। इसके लिए सरकार किसी टॉप लेवल सॉफ्टवेयर कंपनी को भी प्रोजेक्ट से जोड़ने पर विचार कर रही है, ताकि सिस्टम सुरक्षित, तेज़ और यूजर-फ्रेंडली हो। हालांकि, दिल्ली में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के डिजिटलीकरण की कोशिशें नई नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से इस दिशा में प्रयास होते रहे हैं, लेकिन अलग-अलग कारणों से यह योजना बार-बार टलती रही। पिछले साल रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए एक कंसल्टेंट भी नियुक्त किया था, लेकिन विधानसभा चुनावों के चलते काम की रफ्तार धीमी पड़ गई।
अभी कैसे होता है काम
फिलहाल राजधानी में सेल डीड, पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत जैसे दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन के लिए नेशनल जेनेरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (NGDRS) का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा दिल्ली ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इंफॉर्मेशन सिस्टम (DORIS) के जरिए दस्तावेज ऑनलाइन जमा करना, ई-स्टाम्प का भुगतान, अपॉइंटमेंट बुक करना ।
वैभव सूर्यवंशी नहीं… ये खिलाड़ी निकला असली सिक्सर किंग, टीम को बना चुका है IPL चैंपियन
जैसी सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।
हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक इन डिजिटल सुविधाओं के बावजूद पूरी प्रक्रिया अभी भी काफी हद तक मैनुअल बनी हुई है, जिससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और समय भी अधिक लगता है। अब प्रस्तावित सुधार का उद्देश्य इस पूरी व्यवस्था को एंड-टू-एंड डिजिटल बनाना है। नई प्रणाली लागू होने के बाद कागजी काम में भारी कमी आएगी, आमने-सामने संपर्क घटेगा, प्रक्रिया अधिक तेज़ और पारदर्शी बनेगी जवाबदेही और कार्यक्षमता में सुधार होगा ।