कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि बार-बार आने वाले मसल्स क्रैम्प शरीर में किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी, नसों की दिक्कत या ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अगर आपको भी बार-बार क्रैम्प आते हैं तो यह किन बीमारियों का संकेत हो सकता है.
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कैल्शियम की कमी से जुड़ी हो सकती है परेशानी?
कैल्शियम शरीर के लिए बहुत जरूरी मिनरल है, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत रखने के साथ-साथ मांसपेशियों और नसों के सही काम में जरूरी भूमिका निभाता है. गलत खानपान, डेयरी प्रोडक्ट्स और हरी सब्जियों की कमी साथ ही धूप में कम रहने के कारण आजकल बड़ी संख्या में लोग कैल्शियम की कमी का शिकार है. इसकी कमी होने पर मांसपेशियों में बार-बार क्रैम्प्स हड्डियों में दर्द, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस भी है बड़ा कारण
शरीर में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने पर मांसपेशियां ठीक से काम नहीं कर पाती. ज्यादा पसीना आना, उल्टी-दस्त, कम पानी पीना या जरूरत से ज्यादा चाय कॉफी पीने से यह संतुलन बिगड़ सकता है. खास तौर पर मैग्नीशियम पोटेशियम की कमी से हाथ और पैरों में क्रैम्प की समस्या बढ़ जाती है.
विटामिन डी और बी12 की कमी
विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है. इसकी कमी से हड्डियां कमजोर होने लगती है और मांसपेशियों में दर्द व ऐंठन की शिकायत बढ़ जाती है. वहीं विटामिन बी12 की कमी नसों को प्रभावित करती है, जिससे हाथ या पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन और मसल्स क्रैम्प जैसे लक्षण नजर आते हैं.
नसों और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी दिक्कतें
कई बार पैरों तक खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट या सिकुड़न के कारण चलने-फिरने, एक्सरसाइज के दौरान मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन महसूस होती है. इसके अलावा डायबिटीज से जुड़ी नर्व प्रॉब्लम्स या रीढ़ की हड्डी पर दबाव की स्थिति में भी बार-बार क्रैम्प आ सकते हैं.
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क्रैम्प से राहत और बचाव के लिए क्या करें?
अगर क्रैम्प के साथ लगातार थकान, हड्डियों में दर्द, हाथ पैरों में झनझनाहट, नाखूनों का कमजोर होना या कमजोरी महसूस हो रही है तो इसे नजरअंदाज न करें. ये लक्षण शरीर में गंभीर कमी या बीमारी की तरफ इशारा कर सकते हैं. वहीं समय रहते डॉक्टर से जांच कराने पर बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है. इसके अलावा क्रैम्प आने पर प्रभावित हिस्से को स्ट्रेच करें, हल्की मसाज करें और गर्म पानी से सिकाई करें. इसके साथ ही डाइट में कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन और इलेक्ट्रोलाइट से भरपूर चीज शामिल करें और पानी का सेवन पर्याप्त मात्रा में करें.