दिल्ली सरकार का बड़ा कदम: हर इलाके में बदले जाएंगे पानी की पाइपलाइन, मिलेगा साफ पानी
मेवाड़ मिल से मशीनी युग तक
भीलवाड़ा के औद्योगिक रसूख की कहानी आज से करीब 88 साल पहले शुरू हुई थी. साल 1938 में यहां पहली ‘मेवाड़ मिल’ की स्थापना हुई, जिसने राजस्थान के इस हिस्से को औद्योगिक मानचित्र पर जगह दिलाई. 1970 के दशक में ‘राजस्थान साइजिंग इंडस्ट्री’ के आने से यहां विविंग (बुनाई) का काम संगठित हुआ. 1976 में BSL ने महज 24 लूम के साथ शुरुआत की थी, जो आज एक वैश्विक ब्रांड बन चुका है.
विकास की पर्यावरणीय कीमत
लेकिन इस आर्थिक कामयाबी का एक स्याह पहलू भी है. औद्योगिक उत्सर्जन और वेस्ट वाटर के कारण भीलवाड़ा लंबे समय से प्रदूषण की समस्या से जूझ रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, यहां संचालित 35 प्रोसेस हाउस प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत हैं. भीलवाड़ा के स्थानीय निवासी सालों से हवा और पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें करते रहे हैं। अक्सर इन शिकायतों का निस्तारण प्रशासनिक फाइलों में दबकर रह जाता था.
क्या ‘स्मार्टफोन’ रोकेगा प्रदूषण?
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय कार्यालय ने अब एक नया प्रयोग शुरू किया है. एक ऐसा मोबाइल ऐप विकसित किया गया है जो आम आदमी को सीधे निगरानी की शक्ति देता है.
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इस नई व्यवस्था में क्या खास है?
ऐप पर सभी उद्योगों की लोकेशन, उनके फोटो और प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए उपकरणों की जानकारी सार्वजनिक कर दी गई है. देश के किसी भी कोने से शिकायत दर्ज की जा सकती है. शिकायत दर्ज होते ही एक तकनीकी अधिकारी नियुक्त होगा, जिसका नाम और नंबर शिकायतकर्ता को पता होगा. हर तीन दिन में जांच की प्रगति रिपोर्ट ऐप पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है.