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पूछताछ में बड़ा खुलासा
दानिश से पूछताछ में यह भी पता चला है कि पाकिस्तानी हैंडलर किसी दूसरे देश से एक्सपोर्ट कंपनी के जरिए ड्रोन के पार्ट्स भेजने की प्लानिंग कर रहे थे। भारत की किसी इंपोर्ट कंपनी के जरिए यह मंगाया जाना था। जानकारी के मुताबिक जिन ड्रोन्स को भारत भेजने की तैयारी चल रही थी, वह कई किलोमीटर की रेंज और वजन उठाने में सक्षम होते हैं। इसके बाद इन ड्रोन्स की मदद से तैयार विस्फोटक से भारत में अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाना था। हालांकि इससे पहले ही आतंकियों साजिश को नाकाम कर दिया गया।
कैसे किया भंडाफोड़
गौरतलब है कि पूरे मॉड्यूल का भंडाफोड़ तब हुआ जब श्रीनगर पुलिस ने अक्टूबर के मध्य में नौगाम की दीवारों पर लगे पोस्टरों की जांच शुरू की, जिनमें पुलिस और सुरक्षाकर्मियों को चेतावनी दी गई थी। श्रीनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. जीवी संदीप चक्रवर्ती ने जांच का नेतृत्व किया जिसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से पहले तीन संदिग्धों – आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर उल अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद को गिरफ्तार किया।
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अल फलाह यूनिवर्सिटी से कनेक्शन
इन संदिग्धों से पूछताछ के बाद, मौलवी इरफ़ान अहमद, जो एक पूर्व पैरामेडिक था और अब इमाम बन गया है, को गिरफ़्तार कर लिया गया। गौरतलब है कि उस पर पोस्टर उपलब्ध कराने और डॉक्टरों को प्रभावित करने का भी आरोप है। इसके बाद, पुलिस ने फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की जांच की, जहां डॉ. मुज़फ़्फ़र गनई और डॉ. शाहीन सईद को गिरफ़्तार किया गया और 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। जांचकर्ताओं का मानना है कि तीन डॉक्टरों, गनई, उमर नबी (लाल किले के पास विस्फोट करने वाली विस्फोटकों से भरी कार का चालक) और फरार मुज़फ़्फ़र राठेर का एक मुख्य समूह इस मॉड्यूल के पीछे था।