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पूरा मामला जयसिंहनगर के ग्राम विनायक का है। जानकारी के अनुसार, टेटका बस स्टैंड से होकर जंगल के रास्ते सीधी बार्डर के ग्राम चांटी के रास्ते से छत्तीसगढ़ के लिए अंग्रेजी शराब की तस्करी की जा रही थी। ग्रामीणों को इसकी भनक लगी तो विनायक ग्राम पंचायत के सरपंच अमृतलाल सिंह के नेतृत्व में संदिग्ध वाहन क्रमांक CG-04-LF-8601 को पकड़ा। गाड़ी में भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब लदी थी। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस हेल्पलाइन नंबर और जयसिंहनगर पुलिस को दी।
घंटों बाद भी नहीं पहुंची पुलिस
सरपंच के मुताबिक, उन्होंने थाने में पदस्थ एक विनोद नामक पुलिसकर्मी को भी खबर दी थी। लेकिन, घंटों बीत जाने के बाद भी न तो पुलिस पहुंची न ही पुलिस वाहन, इसी देरी का फायदा उठाते हुए कथित शराब ठेकेदार दीपक गुप्ता अपने कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंचा और ग्रामीणों को धमकाकर शराब लदे वाहन को छीनकर भाग निकला। ग्रामीणों ने इस घटना को अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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लंबे समय से चल रहा नेटवर्क
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं, बल्कि लंबे समय से जयसिंहनगर से होकर छत्तीसगढ़ तक शराब की तस्करी का नेटवर्क चल रहा है। शराब की हर खेप के पीछे स्थानीय ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों का हाथ बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस और आबकारी विभाग की आंखें मानो बंद हैं।
किसके बल पर फल फूल रहा गोरखधंधा ?
सरपंच अमृतलाल सिंह ने बताया हमने नशा मुक्ति अभियान के तहत तस्करी रोकने की कोशिश की, पुलिस को सूचना दी, लेकिन वे नहीं आए। शराब ठेकेदार के लोग गाड़ी छीनकर भाग गए। अब गांव में भारी रोष है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि आखिर शराब ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद क्यों है ? क्या जिले में आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत से यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है ?