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DMRC की हाइड्रोजन शटल बस सेवा फिलहाल दिल्ली के सेंट्रल विस्टा क्षेत्र तक सीमित रहेगी। यह बस सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन के बीच संचालित की जाएगी, जिससे इस इलाके में आने-जाने वाले कर्मचारियों और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी। बस अपने रूट के दौरान सेंट्रल विस्टा के कई प्रमुख सरकारी भवनों और महत्वपूर्ण स्थलों को कवर करेगी। इनमें कर्तव्य भवन, विज्ञान भवन, निर्माण भवन, अकबर रोड, बड़ौदा हाउस, नेशनल स्टेडियम, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) और इंडिया गेट शामिल हैं।
कब और कितने बजे मिलेगी हाइड्रोजन शटल बस?
DMRC की हाइड्रोजन शटल बस सेवा खासतौर पर कार्यालय आने-जाने वाले कर्मचारियों और यात्रियों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। यही वजह है कि यह सेवा केवल कार्यदिवसों में संचालित होगी। बसें सोमवार से शुक्रवार तक उपलब्ध रहेंगी, जबकि गजेटेड (राजपत्रित) छुट्टियों के दौरान इनका संचालन नहीं किया जाएगा। समय की बात करें तो हाइड्रोजन शटल बसें सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और दोपहर 3:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगी। यात्रियों की सुविधा के लिए हर 30 मिनट के अंतराल पर एक बस उपलब्ध रहेगी।
किराया कितना होगा और भुगतान कैसे कर सकेंगे यात्री?
DMRC की हाइड्रोजन शटल बस सेवा का किराया यात्रियों की यात्रा दूरी यानी स्टेज के आधार पर तय किया गया है। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए यात्रियों को 10 रुपये या 15 रुपये का टिकट लेना होगा। भुगतान के लिए DMRC ने कई विकल्प उपलब्ध कराए हैं, जिससे यात्रियों को सुविधा मिल सके। यात्री नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC), UPI या नकद भुगतान के जरिए टिकट खरीद सकेंगे।
हाइड्रोजन बस क्या है और इसकी खासियत क्या है?
दिल्ली में पहले से इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि हाइड्रोजन बसों की जरूरत क्यों पड़ी। दरअसल, इन बसों की सबसे बड़ी खासियत इनकी हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक है, जो इन्हें पारंपरिक ईंधन और कई मामलों में इलेक्ट्रिक वाहनों से भी अलग बनाती है। हाइड्रोजन बसों में हाइड्रोजन गैस का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है। फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे बस चलती है। इस पूरी प्रक्रिया में प्रदूषणकारी धुआं नहीं निकलता, बल्कि उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) निकलती है। यही वजह है कि इसे स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन तकनीक माना जाता है।
DMRC की नई हाइड्रोजन शटल बसों का उद्देश्य राजधानी में प्रदूषण कम करना और हरित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। इन बसों को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने उपलब्ध कराया है। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक बस में लगभग 35 यात्रियों के बैठने की क्षमता रखी गई है। इसके अलावा बसों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम और CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिससे रियल-टाइम मॉनिटरिंग और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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एक नजर में हाइड्रोजन शटल बस सेवा
सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन के बीच संचालन सोमवार से शुक्रवार तक सेवा उपलब्ध सुबह 8:30–12:30 और शाम 3:30–6:30 बजे तक संचालन हर 30 मिनट में एक बस किराया 10 रुपये और 15 रुपये NCMC कार्ड, UPI और नकद भुगतान की सुविधा 35 यात्रियों की बैठने की क्षमता GPS ट्रैकिंग और CCTV कैमरों से लैस हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक आधारित पर्यावरण-अनुकूल परिवहन ।