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डाॅ. स्नेह भार्गव का जीवन परिचय
डॉ. स्नेह भार्गव का जन्म उस दौर में हुआ जब भारत में महिला शिक्षा एक चुनौती थी। चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की उपस्थिति बहुत कम थी, लेकिन स्नेह जी का संकल्प अटूट था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और फिर रेडियोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल की। उस समय जब यह क्षेत्र तकनीकी और पुरुष-प्रधान समझा जाता था। अपने प्रारंभिक करियर में उन्होंने कई सामाजिक और पेशेवर चुनौतियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
एम्स (AIIMS) की पहली महिला डायरेक्टर
डॉ. भार्गव केवल एक सफल डॉक्टर नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकएमल साइंसेज (AIIMS) की पहली महिला डायरेक्टर बनने का गौरव भी प्राप्त किया। उन्होंने एम्स में आधुनिक रेडियोलॉजी तकनीकों की नींव रखी और कई पीढ़ियों के डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया। उनके नेतृत्व में संस्थान ने शोध, चिकित्सा शिक्षा और मरीज सेवा के क्षेत्र में नये आयाम छुए।
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इंदिरा गांधी के अंतिम क्षणों का डाॅ. स्नेह को अनुभव
31 अक्टूबर 1984 को डॉ. स्नेह भार्गव का एम्स की निदेशक के रूप में पहला दिन था, उसी समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गोलियों से घायल अवस्था में एम्स लाया गया। डाॅ. स्नेह ने अस्पताल के आपातकालीन विभाग में इंदिरा गांधी को देखा और उनके अंतिम क्षणों की अनुभव किया।
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डॉ. स्नेह भार्गव का सम्मान और योगदान
वह भारत की पहली महिला रेडियोलॉजिस्ट्स में से एक थीं।
एम्स की पहली महिला डायरेक्टर होने का गौरव मिला।
भारतीय रेडियोलॉजिकल और इमेजिंग एसोसिएशन की वरिष्ठ सदस्य बनीं।
चिकित्सा शिक्षा और महिला भागीदारी बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान निभाई।
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।