रायपुर : गर्मी की दस्तक के साथ ही छत्तीसगढ़ में बिजली की खपत तेजी से बढ़ने लगी है। चैत्र माह में ही घरेलू बिजली की मांग 6400 से 6500 मेगावॉट के बीच पहुंच गई है, जबकि बैशाख और ज्येष्ठ जैसे सबसे गर्म महीने अभी बाकी हैं। तापमान बढ़ने के साथ पंखा, कूलर और एयर कंडीशनर का उपयोग बढ़ा है, जिससे बिजली पर दबाव साफ नजर आ रहा है। राज्य में बिजली उत्पादन की कुल क्षमता करीब 2840 मेगावॉट है, जो वर्तमान मांग की तुलना में काफी कम है। इस स्थिति में राज्य को सेंट्रल पूल और निजी कंपनियों से बिजली खरीदनी पड़ रही है। महंगे दाम पर बिजली खरीदने से सरकार के खजाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है।
धान की खेती भी बड़ी वजह
गर्मी में बढ़ती बिजली खपत के पीछे एक अहम कारण धान की सिंचाई भी है। जांजगीर-चांपा, रायगढ़, धमतरी, महासमुंद और जशपुर जैसे जिलों में किसान इस मौसम में धान की बोआई करते हैं। अधिक पानी की जरूरत के चलते मोटर पंप घंटों चलाए जाते हैं, जिससे बिजली की मांग और बढ़ जाती है।
आने वाले वर्षों में और बढ़ेगी चुनौती
केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में छत्तीसगढ़ को 7081 मेगावॉट बिजली की जरूरत होगी। यह आंकड़ा 2021-22 के 5019 मेगावॉट और 2016-17 के 3875 मेगावॉट की तुलना में काफी अधिक है।


