समय के साथ फोन की स्पीड कम होना लगभग तय है. हम रोज़ाना ढेर सारी फोटो, वीडियो, ऐप्स और फाइलें फोन में सेव करते रहते हैं. धीरे-धीरे ये सब डेटा फोन पर लोड बढ़ा देता है जिससे हैंग होने, टच रिस्पॉन्स धीमा होने और ऐप्स खुलने में वक्त लगने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. यही वजह है कि कई लोग इसे ठीक करने के लिए बार-बार फैक्टरी रीसेट का रास्ता चुन लेते हैं.
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हालांकि कुछ खास हालात ऐसे जरूर होते हैं जहां फैक्टरी रीसेट करना सही और जरूरी माना जाता है. उदाहरण के तौर पर जब आप अपना फोन बेचने जा रहे हों या नया फोन लेते समय पुराने को एक्सचेंज कर रहे हों. ऐसी स्थिति में फैक्टरी रीसेट करना बेहद जरूरी होता है ताकि आपकी निजी जानकारी किसी और के हाथ न लगे.
इसके अलावा, अगर फोन जरूरत से ज्यादा हैंग करने लगे और सामान्य उपाय जैसे कैश क्लियर करना या गैर-जरूरी ऐप हटाना भी काम न आएं, तब फैक्टरी रीसेट एक विकल्प बन सकता है. कई बार नया सॉफ्टवेयर अपडेट इंस्टॉल करने के बाद फोन पहले से ज्यादा स्लो या अस्थिर हो जाता है. अगर अपडेट के बाद लगातार दिक्कतें आने लगें तो फैक्टरी रीसेट करने से समस्या दूर हो सकती है.
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एक और गंभीर स्थिति तब होती है, जब फोन में वायरस या मैलवेयर घुस जाता है. कभी-कभी थर्ड पार्टी वेबसाइट से डाउनलोड की गई फाइल या ऐप फोन को नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में फोन अजीब तरह से काम करने लगता है और सामान्य तरीकों से समस्या ठीक नहीं होती. तब फैक्टरी रीसेट करना सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता है.
फैक्टरी रीसेट तभी करना चाहिए जब इसकी सच में जरूरत हो. हर छोटी समस्या पर इस विकल्प को चुनना एक आम लेकिन गलत आदत बन चुकी है. थोड़ी समझदारी और सही फैसले से आप अपने फोन को लंबे समय तक बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं.