‘मैं जिंदा हूं’, नोरा फतेही ने खतरनाक Car Accident के बाद दी Health Update, कहा- ‘एक शराबी ने मुझे…’
1. भारत का ऑल-वुमन एवरेस्ट अभियान
1993 में इंडो-नेपाल महिला एवरेस्ट अभियान का नेतृत्व बछेंद्री बाल ने किया था। ये दुनिया के सबसे बड़े महिला पर्वतारोहण अभियानों में शामिल है। इस अभियान में 18 महिला पर्वतारोहियों ने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की। यह उस दौर की बात है जब पर्वतारोहण को लगभग पूरी तरह पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था। इसी टीम ने कई रिकॉर्ड बनाए, जैसे उस वक्त सबसे कम उम्र की महिला पर्वतारोही होना और पहली महिला जिसने एवरेस्ट पर दो बार चढ़ाई की। यह सिर्फ साहस नहीं था, यह उस सोच का खंडन था कि भारतीय महिलाएं सीमित हैं।
2. भारत में महिला पायलटों की संख्या दुनिया के औसत से कहीं ज़्यादा
वैश्विक स्तर पर जहां महिला पायलटों की औसत हिस्सेदारी केवल 5–6% है, वहीं भारत में लगभग 15% पायलट महिलाएं हैं। इंडियन एयरलाइंस ने महिलाओं की हायरिंग और प्रमोशन पर सक्रिय नीतियां अपनाईं। इंडिगो, एयर इंडिया या विस्तारा जैसी एयरलाइंस में महिला कैप्टन आम दृश्य हैं। यह आंकड़ा भारत को महिला एविएशन में ग्लोबल लीडर बनाता है। यह साबित करता है कि अवसर मिले तो भारतीय महिलाएं ऊंचाई से नहीं डरतीं, वे उसे नियंत्रित करती हैं।
3. दुनिया के सबसे पुराने महिला-नेतृत्व वाले बाज़ारों में एक भारत
मणिपुर का इमा केइथेल ऐसा बाजार है, जिसका नेतृत्व महिलाएं करती हैं। ये बाजार आर्थिक नेतृत्व का जीवित उदाहरण है। इम्फाल में स्थित इमा केइथेल को मदर्स मार्केट भी कहते हैं जो पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित है। सैकड़ों वर्षों से निरंतर सक्रिय यह बाजार दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने महिला-ओनली मार्केट्स में शामिल है। यहां हजारों महिलाएं व्यापार, मूल्य निर्धारण और आपूर्ति श्रृंखला खुद संभालती हैं। जब दुनिया महिला उद्यमिता पर सेमिनार कर रही थी, तब मणिपुर की महिलाएं उसे जी रही थीं।
T20 World Cup 2026: 4 साल बाद T20 वर्ल्ड कप में इस खिलाड़ी को खेलने का मिलेगा मौका, पाकिस्तान के खिलाफ बने थे ‘विलेन’
4. भारत की पहली महिला फोटो-जर्नलिस्ट ने आजादी का इतिहास कैमरे में क़ैद किया
होमाई व्यारावाला भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट थीं। जब अखबारों में महिलाओं को नौकरी तक नहीं मिलती थी, तब होमाई व्यारावाला ने भारत के इतिहास को दस्तावेज़ किया। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, स्वतंत्रता आंदोलन, विभाजन और आजादी के ऐतिहासिक क्षण को कैप्चर किया। मानवीय दृष्टि और गरिमा के साथ फोटो-जर्नलिज़्म को उन्होंने बढ़ावा दिया। वह सिर्फ़ पहली महिला फोटो-जर्नलिस्ट नहीं थीं, बल्कि भारत की स्मृति की संरक्षक थीं।
5. दुनिया की सबसे बड़ी मातृसत्तात्मक प्रणालियों में से एक भारत
भारत को पुरुष प्रधान देश कहते हैं लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी मातृसत्तात्मक समाज प्रणालियों में हमारा देश भी शामिल है। मातृसत्तात्मक प्रणाली में वंश और संपत्ति महिलाओं से चलती है। मेघालय की ख़ासी, गारो और जैंतिया जनजातियों में संपत्ति महिलाओं के नाम होती है। यहां उपनाम मां से आगे बढ़ता है और परिवार का नेतृत्व महिलाओं के पास होता है। इसके अलावा केरल की नायर, कर्नाटक की बंट और बिलावा समुदायों में भी मातृसत्तात्मक परंपराएं मौजूद हैं। यह तथ्य उस धारणा को तोड़ता है कि भारतीय समाज हमेशा और हर जगह पुरुष-प्रधान रहा है।
6. भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा महिला STEM ग्रेजुएट तैयार करेगा
विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित कोर्स में सबसे ज्यादा भारतीय महिलाएं हिस्सेदार बन रही हैं। ऐसा होने से भविष्य की टेक्नोलॉजी में महिलाओं की निर्णायक भूमिका रहेगी। भारत में 25 लाख से अधिक महिला STEM ग्रेजुएट्स हैं। अनुमान है कि 2030 तक भारत, चीन को पीछे छोड़ देगा। सॉफ्टवेयर, AI, डेटा साइंस और इंजीनियरिंग में महिलाओं की भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है। यह सिर्फ़ संख्या नहीं, संकेत है कि दुनिया की डिजिटल रीढ़ भारत की महिलाएं बन रही हैं।