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कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर क्या होता है?
हेल्थ और साइंस के बारे में जानकारी देने वाली बेवसाइट knowridge की रिपोर्ट के अनुसार, कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर वह स्थिति है, जब दिल शरीर में खून को ठीक से पंप नहीं कर पाता. ऐसे में दिल कमजोर या सख्त हो जाता है और ब्लड फ्लो प्रभावित होने लगता है. इसका असर यह होता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है, खासकर फेफड़ों में. यही जमा हुआ फ्लूइड खांसी की मुख्य वजह बनता है.
सांस और खांसी की दिक्कत
दरअसल, दिल और फेफड़े एक-दूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं. फेफड़े शरीर को ऑक्सीजन देते हैं और दिल उस ऑक्सीजन युक्त खून को पूरे शरीर में पहुंचाता है. जब दिल ठीक से काम नहीं करता, तो यह संतुलन बिगड़ जाता है. ऐसे में फेफड़ों में तरल भरने लगता है, जिसे पल्मोनरी कंजेशन कहा जाता है. इससे सांस लेने में दिक्कत होती है और खांसी शुरू हो जाती है. इस तरह की खांसी की कुछ खास पहचान भी होती है. शुरुआत में यह सूखी हो सकती है, लेकिन कई बार इसमें बलगम भी आ सकता है. अगर बलगम सफेद या गुलाबी रंग का दिखे, तो यह फेफड़ों में फ्लूइड जमा होने का संकेत हो सकता है और ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है.
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क्या होती है वजह?
कई मरीज बताते हैं कि यह खांसी रात में या लेटने पर ज्यादा बढ़ जाती है. इसकी वजह ग्रेविटी है. जब व्यक्ति खड़ा या बैठा होता है, तो तरल शरीर के निचले हिस्सों में रहता है, लेकिन लेटने पर यह छाती और फेफड़ों की ओर आ जाता है, जिससे सांस और खांसी की समस्या बढ़ जाती है. अक्सर लोग इस खांसी को सर्दी-खांसी या लंग्स की समस्या समझ लेते हैं, जबकि असल में यह दिल से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकता है. इसलिए अगर खांसी लंबे समय तक बनी रहे या इसके साथ सांस फूलना, थकान, पैरों या टखनों में सूजन जैसे लक्षण भी दिखें, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.