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कैसे फैलता है यह वायरस?
mensjournal की रिपोर्ट के अनुसार, के मुताबिक, यह वायरस भी बाकी सांस से जुड़ी बीमारियों की तरह ही फैलता है. इंफेक्टेड व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों के जरिए यह दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है. इसके अलावा, किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना, हाथ मिलाना या किसी इंफेक्टेड सतह को छूने के बाद चेहरे को छूना भी इंफेक्शन का कारण बन सकता है. इसलिए साफ-सफाई और सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है.
कब दिखता है इसका असर?
दिलचस्प बात यह है कि यह वायरस आमतौर पर फ्लू के बाद अपना असर दिखाता है. जहां फ्लू का पीक सर्दियों में होता है, वहीं HMPV के मामले अक्सर मार्च के अंत से लेकर अप्रैल तक बढ़ते हैं. यानी जब लोग सोचते हैं कि फ्लू का खतरा टल गया, उसी समय यह वायरस धीरे-धीरे फैलने लगता है. फिलहाल, अमेरिका के वेस्ट कोस्ट, खासकर कैलिफोर्निया में इसके मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है. हालांकि यह वायरस दुनिया के अन्य हिस्सों में भी पाया जाता है, लेकिन हर साल इसके मामलों का ट्रेंड अलग हो सकता है.
क्या होती हैं दिक्कतें?
अगर जोखिम की बात करें, तो यह वायरस सभी को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है. छोटे बच्चों, बुजुर्गों, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों, लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहे मरीजों, सांस से जुड़ी बीमारी वाले और कैंसर के मरीजों में इसके गंभीर लक्षण देखने को मिल सकते हैं. वहीं, स्वस्थ लोगों में इसके लक्षण हल्के भी हो सकते हैं. इसके लक्षण भी आम सर्दी-जुकाम जैसे ही होते हैं. जैसे खांसी, बुखार, नाक बंद होना, छाती में जकड़न और गले में खराश. यही वजह है कि कई बार लोग इसे सामान्य फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं.
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क्या है इलाज?
इलाज की बात करें तो फिलहाल इस वायरस के लिए कोई खास एंटीवायरल दवा मौजूद नहीं है. ऐसे में डॉक्टर आमतौर पर वही सलाह देते हैं जो सर्दी-जुकाम में दी जाती है कि ज्यादा से ज्यादा आराम करें, शरीर को हाइड्रेट रखें और जरूरत पड़ने पर ओवर-द-काउंटर दवाओं का इस्तेमाल करें.