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क्या होता है नुकसान?
सबसे पहले आपको यह समझने की जरूरत है कि लेक्ट्रोलाइट्स शरीर के फ्लूइड लेवल को बैलेंस रखते हैं और मांसपेशियों, नसों और अंगों को सही तरह काम करने में मदद करते हैं. लेकिन ओवरडोज होने पर यही मिनरल्स उल्टा असंतुलन पैदा कर देते हैं. brgeneral की रिपोर्ट के अनुसार, इसका असर कमजोरी, सिरदर्द, कंपकंपी, कन्फ्यूजन, मांसपेशियों में खिंचाव, तेज धड़कन, मतली और पेट खराब जैसे लक्षणों में दिखाई दे सकता है.शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का अत्यधिक बढ़ जाना हाइपरनैट्रेमिया या हाइपरकैलिमिया जैसी स्थितिय पैदा कर सकता है, जिनसे नसों और हार्ट की काम करने के तरीकों पर असर पड़ता है. ऐसी ओवरलोड स्थिति में दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे शरीर का फ्लूइड बैलेंस बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इलेक्ट्रोलाइट पाउडर बेचने वाले कई ब्रांड एक पैकेट को तय मात्रा में पानी में घोलकर पीने की सलाह देते हैं. कुछ लोग इसे रोजाना इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कंपनियां भी यह मानती हैं कि बार-बार सेवन को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
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आपको क्या करना चाहिए?
अगर आपका इलेक्ट्रोलाइट लॉस बहुत ज्यादा नहीं है, जैसे भारी पसीना, एक्सरसाइज या स्टमक इंफेक्शन न हो तो इलेक्ट्रॉल बार-बार पीना ओवरडोज ही माना जाएगा. ऐसी स्थिति में पानी सबसे बेहतर है. वर्कआउट के लिए, विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरू करने से 45 से 60 मिनट पहले 8 से 16 औंस पानी, एक्सरसाइज के दौरान हर 15 से 20 मिनट में 5 से 9 औंस पानी और अगर 30 मिनट से ज्यादा की एक्टिविटी हो, तभी इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक लें, वो भी शुगर लेवल देखकर. इलेक्ट्रॉल जरूरी है, लेकिन सिर्फ उतना जितना शरीर को जरूरत हो. ज्यादा मात्रा में यह भी नुकसान कर सकता है.