Good News: उत्तर पश्चिम रेलवे का बड़ा फैसला, राजस्थान की 9 स्पेशल ट्रेनों में जुड़े 57 जनरल कोच, यात्रियों को बड़ी राहत
कौन हैं अन्नपूर्ण दत्त?
1894 में अविभाजित बंगाल में जन्मीं अन्नपूर्णा दत्त ने बचपन से ही अलग सोच रखी। उस दौर में फोटोग्राफी का क्षेत्र लगभग पूरी तरह पुरुषों के कब्ज़े में था, लेकिन उन्होंने इस धारा को तोड़ा। 1920 के दशक में उन्होंने प्रोफेशनल फोटोग्राफी की दुनिया में कदम रखा और 1930 से 40 के दशक में अपने करियर के शिखर पर पहुंचीं।
अन्नपूर्णा का करियर और खासियत
अन्नपूर्णा दत्त का काम सिर्फ तस्वीरें खींचना नहीं था, बल्कि समाज की झलक पेश करना था। वह खासतौर पर परिवारों के घरेलू जीवन को अपने कैमरे में उतारती थीं। धनी और एलीट परिवारों की तस्वीरें खींचना उनका विशेष क्षेत्र था। उन्होंने सरोजिनी नायडू जैसी राष्ट्रीय हस्तियों, बंगाल के प्रमुख नेता हसन सुहरावर्दी, कवि जसीमुद्दीन और गायक अब्बास उद्दीन अहमद की तस्वीरें खींचीं।
एक महिला फोटोग्राफर होने की चुनौती
उस दौर में महिलाओं का बाहर निकलकर काम करना बहुत कठिन था। इसी वजह से अन्नपूर्णा दत्त ने अपने स्टूडियो तक ही सीमित रहकर काम किया और अक्सर ग्राहकों के घर जाकर उनकी तस्वीरें लीं। यह उनकी सूझबूझ थी, जिसने उन्हें समाज के दायरे में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर दिया।
Sadhvi Prem Baisa : बेटी की मौत के 21 दिन बाद साध्वी प्रेम बाईसा के पिता की तबीयत नाज़ुक, लिया था बड़ा संकल्प
सबसे प्रसिद्ध फोटो
अन्नपूर्णा दत्त का सबसे प्रसिद्ध काम उनका सेल्फ-पोर्ट्रेट है। इसमें वह साधारण बंगाली महिला की तरह साड़ी और गहनों में सजी दिखाई देती हैं, लेकिन उनके हाथ में प्लेट कैमरा है जो उस समय महिलाओं के हाथ में एक असामान्य दृश्य था। यह तस्वीर आज न सिर्फ उनकी कला बल्कि उनके साहस और स्वतंत्र सोच की प्रतीक है। आज उनकी तस्वीरें उनके बेटे उपेन्द्रनाथ दत्त के कलेक्शन में मौजूद हैं और फोटोग्राफी की दुनिया में उनके योगदान को याद किया जाता है। अन्नपूर्णा दत्त सिर्फ एक फोटोग्राफर नहीं थीं, बल्कि वह उन महिलाओं की प्रेरणा हैं जो सामाजिक बंधनों को तोड़कर अपने सपनों को जीना चाहती हैं।