छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग: 85 उम्मीदवारों को आबकारी उप निरीक्षक के पद पर नियुक्ति, दस्तावेज़ और शारीरिक मापदंड का सत्यापन शुरू
करकला सब-डिवीजन के सीनियर पुलिस ऑफिसर हर्ष प्रियंवदा की अगुवाई वाली इन्वेस्टिगेशन टीम ने टेक्निकल सर्विलांस के जरिए कुमार का पता लगाया. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, कुमार ने कथित तौर पर अपने नाम से एक SIM कार्ड खरीदा और पैसे के बदले मुख्य आरोपी को दे दिया.
पुलिस अधिकारी ने कहा, “गुजरात का आरोपी SIM कार्ड और OTP दे रहा था, जिनका इस्तेमाल पाकिस्तानी हैंडलर्स से बातचीत के लिए WhatsApp अकाउंट एक्टिवेट करने में किया जाता था.” पुलिस का मानना है कि यह SIM कार्ड जासूसी गिरोह द्वारा WhatsApp जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए बातचीत करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक जरूरी टूल था, जिससे स्टैंडर्ड सिक्योरिटी मॉनिटरिंग को बाइपास किया जा सके.
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क्या है पूरा मामला
यह मामला इस साल नवंबर में सामने आया, जब मालपे में उडुपी कोचीन शिपयार्ड में सिक्योरिटी ब्रीच की रिपोर्ट मिली. शिपयार्ड ने सुषमा मरीन प्राइवेट लिमिटेड को सबकॉन्ट्रैक्टर के तौर पर हायर किया है. सबकॉन्ट्रैक्टर के दो कर्मचारी, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं – रोहित (29) और संतरी (37) – को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. इन पर आरोप है कि उन्होंने इंडियन नेवी के जहाजों के पहचान नंबरों की एक कॉन्फिडेंशियल लिस्ट हासिल की और उसे शेयर किया और जहाज की मरम्मत के शेड्यूल और सेंसिटिव इंफ्रास्ट्रक्चर डेटा की डिटेल्स भेजीं.