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हमलावर गेट पर ही हुआ था बेनकाब
रिपोर्ट के मुताबिक, हमलावर को इमामबारगाह के मुख्य गेट पर रोक लिया गया था, जिसके बाद उसने वहीं विस्फोट कर दिया. धमाके के बाद मस्जिद के अंदर और गेट के पास कई शव पड़े दिखाई दिए, जबकि घायलों को आसपास के लोग अपनी गाड़ियों में अस्पताल लेकर गए. बताया गया कि रेस्क्यू की पहली गाड़ी करीब 40 मिनट बाद पहुंची.
चश्मदीदों ने बताया- नमाज के दौरान गोलियों की आवाज आई
एक चश्मदीद मुहम्मद काजिम (52) ने कहा कि पहली रकअत के सज्दे के दौरान ही गोलियों की आवाज सुनाई दी और कुछ ही सेकंड बाद तेज धमाका हुआ. एक अन्य चश्मदीद सैयद अश्फाक ने बताया कि उन्होंने 6-7 गोलियां चलने की आवाज सुनी. उनके अनुसार, हमलावरों ने पहले सुरक्षा गार्डों को निशाना बनाया और फिर एक आत्मघाती हमलावर मुख्य हॉल तक पहुंच गया. उन्होंने बताया कि अंदर मौजूद 22 वर्षीय औन अब्बास ने हमलावर को रोकने की कोशिश की, लेकिन धमाके में उनकी भी मौत हो गई.
हमलावर की पहचान, ISIS से संबंध का शक
सूत्रों के मुताबिक, घटना स्थल से मिला हमलावर का सिर जांचकर्ताओं को मिला है, जिसके आधार पर उसकी पहचान पेशावर के गंज इलाके के निवासी के रूप में हुई है. जांच एजेंसियों ने बताया कि हमलावर के आतंकी संगठन ISIS से जुड़े होने और कई बार अफगानिस्तान आने‑जाने के प्रमाण मिले हैं. पेशावर पुलिस को उसके परिवार से पूछताछ करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि इलाके की जियो‑फेंसिंग भी की जा रही है. कई संदिग्धों को पकड़ने के लिए छापे भी जारी हैं.
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IGP इस्लामाबाद का चचेरा भाई भी मारा गया
हमले में इस्लामाबाद के आईजीपी सैयद अली नासिर रिजवी का 33 वर्षीय चचेरा भाई सैयद हसन अली भी मारा गया. उनके पिता, रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर सैयद महमूद अली, घायल हुए हैं. उनके दोस्त इकरामुल्लाह ने बताया कि हसन अली अपने पिता को बचाने की कोशिश में मारे गए.