D.Ed Students Protest: सहायक शिक्षकों की भर्ती की मांग को लेकर अनशन पर बैठे डीएड अभ्यर्थियों की तबियत बिगड़ी
सौहार्दपूर्ण पहल, फिर अचानक कैसे बिगड़ा माहौल?
दरअसल, यह पूरा मामला चौमूं की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने से जुड़ा है. बस स्टैंड क्षेत्र में मस्जिद के पास करीब 45 सालों से सड़क किनारे पत्थर पड़े थे, जिसकी वजह से अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती थी. एक दिन पहले ही चौमूं थाना पुलिस और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक हुई थी. इसमें आपसी सहमति बनी कि सड़क से पत्थर हटा लिए जाएं ताकि जनता को राहत मिले.
समुदाय की मौजूदगी में ही पत्थरों को हटाने का काम शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कर लिया गया था. प्रशासन इसे एक बड़ी सफलता मान रहा था. लेकिन विवाद आज तड़के करीब 3 बजे तब शुरू हुआ जब खाली की गई जगह पर कुछ लोगों द्वारा रेलिंग लगाने का काम शुरू किया गया. इसी दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने विरोध शुरू कर दिया और मामला हिंसक हो गया.
इलाका छावनी में तब्दील, अफवाहों से बचने की अपील
विरोध ने देखते ही देखते उग्र रूप धारण कर लिया. बस स्टैंड क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई और पुलिस बल को निशाना बनाकर पथराव शुरू कर दिया गया. पत्थरों की बारिश में आधा दर्जन जवान जख्मी हो गए. हालात हाथ से निकलते देख पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद भीड़ तितर-बितर हुई. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है. उच्च अधिकारी खुद स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. अतिरिक्त पुलिस बल ने पूरे बस स्टैंड इलाके को घेर रखा है और संदिग्धों की निगरानी की जा रही है.
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सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस, होगी कड़ी कार्रवाई
चौमूं थानाधिकारी प्रदीप शर्मा ने स्पष्ट किया है कि केवल सड़क पर पड़े पत्थरों को हटाया गया था. उन्होंने चेतावनी दी है कि जो भी सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर उन लोगों की पहचान कर रही है जिन्होंने शांति भंग करने और सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की.