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22 प्रतिशत लाभार्थियों का नहीं हो पाया सत्यापन
विभागीय जानकारी के अनुसार तय समय सीमा तक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होने के चलते यह कार्रवाई की गई है. जिसके कारण जिन्होंने सत्यापन नहीं करवाया था उन सभी की पेंशन रोकी गई है. बता दें कि प्रदेश में कुल 71 लाख 46 हजार 713 पेंशन लाभार्थी हैं. इनमें से 20.36 लाख लाभार्थियों का वार्षिक सत्यापन नहीं हो पाया. जो कुल लाभार्थियों का करीब 22 प्रतिशत है.
समय पर वेरिफिकेशन न होने पर रोकी पेंशन
वेरिफिकेशन न होने की वजह से इन सभी लोगों की पेंशन अब कुछ समय के लिए रोक दी गई है.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के मुताबिक, वेरिफिकेशन की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तक तय की गई थी. इसके बावजूद, बड़ी संख्या में बेनिफिशियरी तय समय में प्रोसेस पूरा नहीं कर पाए. इस वजह से उनकी पेंशन कुछ समय के लिए रोक दी गई है. उन्हें यह भी सलाह दी गई है कि वे जल्द से जल्द ई-मित्र या संबंधित ऑफिस जाकर अपना वेरिफिकेशन करवा लें.
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जयपुर और जोधपुर में आंकड़ा सबसे ज्यादा
बता दें कि यह आंकड़ा जयपुर और जोधपुर जिलों में सबसे ज़्यादा है. पिंक सिटी में 6.11 लाख पेंशनर हैं, जिनमें से 4.39 लाख का वेरिफिकेशन हो चुका है, जबकि 1.72 लाख बेनिफिशियरी का वेरिफिकेशन नहीं हुआ है. जबकि ब्लू सिटी में 3.44 लाख में से बड़ी संख्या में पेंशनर का वेरिफिकेशन पेंडिंग है. दूसरे जिलों में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई है.
ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने के लिए रोकी पेंशन
डिपार्टमेंट ने साफ किया है कि सत्यापन पूरा होते ही पेंशन फिर से शुरू कर दी जाएगी और पात्र लाभार्थियों को बकाया भी दे दिया जाएगा. इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि वेरिफिकेशन का मकसद अपात्र लाभार्थियों को स्कीम से बाहर करना और पात्र लोगों को समय पर फायदा पहुंचाना है. इसके लिए पेंशन स्कीम में ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने और फ्रॉड रोकने के लिए यह प्रोसेस जरूरी है. अब पेंडिंग केस को निपटाने के लिए डिपार्टमेंट लेवल पर कैंपेन चलाने की तैयारी की जा रही है ताकि असली बेनिफिशियरी को कोई दिक्कत न हो.