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जिलावार स्थिति की बात करें तो बेमेतरा और राजनांदगांव जिले सबसे आगे हैं, जहां 96 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार हो चुकी है। वहीं रायगढ़, कोरिया, रायपुर, कोरबा, धमतरी, दुर्ग और बलौदाबाजार जिलों में भी 93 प्रतिशत से अधिक छात्रों को यह डिजिटल पहचान मिल चुकी है। नारायणपुर, बीजापुर, सुकमा, बलरामपुर और दंतेवाड़ा को छोड़कर प्रदेश के बाकी सभी जिलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा विद्यार्थियों की अपार आईडी बन चुकी है। भारत सरकार ने सभी राज्यों को 31 जनवरी 2026 तक शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार करने का लक्ष्य दिया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में भी शेष छात्रों की आईडी बनाने का काम तेजी से जारी है।
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अपार आईडी के जरिए हर विद्यार्थी को एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान मिलती है। इसमें छात्र की पढ़ाई से जुड़ी जानकारी, प्रमाण पत्र और उपलब्धियों का सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड रहता है। इससे आगे की पढ़ाई, संस्थान बदलने और राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं का लाभ लेना आसान हो जाता है।