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अस्पताल से आश्रम तक
भोमाराम ने बताया कि 28 जनवरी शाम 6:52 बजे उसे वीरमनाथ के फोन से कॉल आया। फोन सुरेश ने उठाया और बताया कि बाईसा की तबीयत खराब है, तुरंत प्रेक्षा हॉस्पिटल पहुंचो। वह 7:31 बजे अस्पताल पहुंचा, तब तक साध्वी का निधन हो चुका था। अस्पताल में डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम कराने को कहा। भोमाराम के अनुसार वीरमनाथ ने पहले पार्थिव शरीर को आश्रम ले जाने और श्रद्धांजलि के बाद पोस्टमॉर्टम कराने की बात कही। रात करीब 8:45 बजे सभी लोग अस्पताल से आश्रम के लिए रवाना हुए और रास्ते में संतों को सूचना दी गई।
पोस्ट में देरी क्यों हुई
भोमाराम का कहना है कि आश्रम पहुंचने के बाद वीरमनाथ ने सोशल मीडिया पर सूचना डालने को कहा। उसने रात 9:38 बजे इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। इसके बाद भक्तों का आना शुरू हो गया और संदेश तेजी से फैल गया। उसी दौरान कुछ युवकों ने वहां विरोध और नारेबाजी की, माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस पहुंची और बाद में पार्थिव शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिए महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया।
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SIT कर चुकी है पूछताछ
भोमाराम ने बताया कि वायरल वीडियो के बाद SIT ने उससे भी पूछताछ की है। उसने कहा कि आश्रम करीब एक साल पहले बना था और वहां अभी सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे, केवल वायरिंग कराई गई थी। साध्वी के पिता वीरमनाथ ने पुलिस को बताया है कि 28 जनवरी दोपहर साध्वी को एक इंजेक्शन लगाया गया था। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। मौत के कारणों को लेकर अब तक स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस अब तक करीब 37 लोगों से पूछताछ कर चुकी है और जांच जारी है।