सर्वे के दौरान जुटाई गई सभी जानकारियां डिजिटल रूप से दर्ज की जाएंगी, ताकि हर लाभार्थी का सटीक और अपडेटेड डेटा सरकारी सिस्टम में मौजूद रहे। सर्वे टीम टैबलेट लेकर घर-घर पहुंचेगी और बुजुर्गों की तस्वीर, पहचान पत्र और आधार कार्ड की जांच करेगी। इस दौरान पेंशनधारक की लोकेशन की सटीक पुष्टि के लिए जियो ट्रैकिंग का उपयोग किया जाएगा। इस प्रक्रिया से पेंशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा। अगर कोई लाभार्थी लगातार तीन बार घर पर नहीं मिलता है, तो उसकी पेंशन पर रोक लग सकती है।
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फर्जी लाभार्थियों पर शिकंजा कसने की तैयारी
समाज कल्याण विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई लाभार्थी या तो दिल्ली छोड़ चुके हैं या उनका निधन हो चुका है, फिर भी उनके खातों में पेंशन जा रही है। इसके अलावा, कुछ लोग दूसरे शहर में रहते हुए भी पुराने पते पर लाभ ले रहे थे। इस स्थिति को सुधारने और पेंशन वितरण को सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए यह अभियान आरंभ किया गया है। राजधानी में इस योजना के तहत लगभग 4 लाख वरिष्ठ नागरिक पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। जागरूकता के अनुसार वितरण नजफगढ़ क्षेत्र में सबसे अधिक लाभार्थी हैं। नई दिल्ली विधानसभा में पेंशन धारकों की संख्या सबसे कम है।
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कितनी मिलती है पेंशन और कैसे होता है भुगतान
दिल्ली सरकार की वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत बुजुर्गों को मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। 60 से 69 वर्ष के बुजुर्गों को 2,000 रुपये प्रति माह। 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को 2,500 रुपये या उससे अधिक की सहायता। अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के लाभार्थियों को 500 रुपये अतिरिक्त प्रति माह। यह पूरी राशि सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। पात्र व्यक्ति ऑनलाइन ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस डिजिटल प्रक्रिया से बुजुर्ग आसानी से योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।