आज की जिंदगी में हम सभी बिजी रहने के आदी हो गए हैं पूरा दिन मीटिंग, ईमेल, काम और सोशल मीडिया में गुजर जाता है.कभी-कभी तो हम खुद से भी कह देते हैं कि हमें बिजी रहना पसंद है और यही हमारे जीवन का हिस्सा बन गया है.लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमेशा बिजी रहने की आदत हमारी स्वास्थ्य और स्थिति के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है.
हम अक्सर बिजी रहने को प्रोडक्टिविटी समझते हैं. लेकिन सच यह है कि लगातार काम करना आपके शरीर और मन पर दबाव डालता है. लगातार बिजी रहने से तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) बढ़ जाता है. नींद हल्की हो जाती है और मांसपेशियां लगातार तनाव में रहती हैं. सिरदर्द, पेट की समस्या और बार-बार बीमार पड़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं. यह कोई कमजोरी नहीं है, बल्कि जीव विज्ञान का नियम है. आपका शरीर लगातार दबाव महसूस कर रहा है, भले ही आप कहें कि सब ठीक है.
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तनाव और थकान हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देती, कभी-कभी यह धीरे-धीरे अंदर से कमजोर करता है. पहले जिन चीजों में मजा आता था, अब वह नीरस लगने लगता है. छोटी-छोटी खुशियों में आनंद नहीं आता, आप बार-बार थके हुए और एनर्जेटिक दोनों महसूस कर सकते हैं. यह संकेत है कि आपका दिमाग और शरीर लगातार सतर्क और तनावग्रस्त हैं.
हमेशा बिजी रहना सिर्फ हमारी हेल्थ को ही नहीं, बल्कि हमारे रिश्तों को भी प्रभावित करता है. जब आपका शेड्यूल बहुत बिजी होता है, तो आप लोगों के साथ पूरी तरह उपस्थित नहीं रहते, थकान और ध्यान की कमी के कारण, आप अपने प्रियजनों को सही समय और ध्यान नहीं दे पाते, धीरे-धीरे दूरी बढ़ने लगती है, और यह आपके रिश्तों को कमजोर कर सकता है. सच यह है कि सब कुछ करने में बिजी रहना, अक्सर उन चीजों को खोने का कारण बनता है जो जीवन को सच में खुशहाल बनाती हैं.
हम अक्सर सोचते हैं कि आराम करना कमजोरी या अलस्य है. लेकिन वास्तविकता बिल्कुल उलटी है. आराम करने से शरीर और दिमाग सक्रिय और स्वस्थ रहते हैं. यह तरीका है जिससे दिमाग चीजों को सुलझाता है और शरीर अपने आप को ठीक करता है. रचनात्मकता बढ़ती है और आप याद रखते हैं कि आप सिर्फ काम नहीं, बल्कि एक इंसान भी हैं. छोटे-छोटे आराम के पल, जैसे बिना हेडफोन टहलना या किसी पसंदीदा चीज में खो जाना, शरीर और दिमाग के लिए बहुत जरूरी हैं.
जब आप हर वक्त बिजी रहने के आदी हो जाते हैं, तो यह सिर्फ अस्थायी स्थिति नहीं रहती, हर खाली पल को काम या बिजीता से भरने की इच्छा होने लगती है. आप अपनी थकान के बारे में डींगें मारने लगते हैं. खुद को और अपने शरीर को सुनना बंद कर देते हैं. यह आदत धीरे-धीरे आपकी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को कमजोर कर देती है.
छोटे-छोटे बदलाव जीवन को आरामदायक बना सकते हैं. दिन का कुछ समय खाली और अव्यवस्थित रखें, बिना योजना के कुछ मिनट टहलें या किसी हल्की एक्टिविटी में खो जाएं. अपने आप को याद दिलाएं कि लाइफ सिर्फ काम और दौड़ नहीं है. धीमा होना और खुद को समय देना, पीछे छूटने का संकेत नहीं है. बल्कि, यह जीवन में स्थिर और स्वस्थ बने रहने का तरीका है.



