AI Safe career Option: इन करियर पर नहीं पड़ेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर, देखें पूरी लिस्ट
बेड पर लैपटॉप रखने से ओवरहीटिंग का खतरा
लैपटॉप के नीचे एयर वेंट होते हैं, जिनसे गर्म हवा बाहर निकलती है. लेकिन बेड, सोफा या कंबल जैसे सॉफ्ट सरफेस पर रखने से ये वेंट ब्लॉक हो जाते हैं. गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और लैपटॉप तेजी से ओवरहीट होने लगता है. इससे न सिर्फ परफॉर्मेंस घटती है बल्कि चिपसेट और मदरबोर्ड पर भी भारी दबाव पड़ता है जो अंत में उन्हें जला सकता है.
कूलिंग फैन पर असर, सिस्टम स्लो और लैग
जब हवा का फ्लो रुक जाता है, तो कूलिंग फैन ज्यादा तेज घूमने लगता है. इससे फैन खराब होने लगता है और लैपटॉप बार-बार लैग करने लगता है. यही वजह है कि कई बार बेड पर थोड़ी देर इस्तेमाल करने के बाद भी सिस्टम स्लो हो जाता है. लंबे समय तक ऐसा चलने पर फैन और मदरबोर्ड दोनों ही डैमेज हो सकते हैं.
डस्ट और पार्टिकल्स अंदर जाकर सर्किट को खराब करते हैं
बेड की चादर, तकिये, कंबल में मौजूद छोटे-छोटे रेशे और धूल के कण लैपटॉप के अंदर जाने लगते हैं. ये धूल फैन, RAM स्लॉट, थर्मल पेस्ट और मदरबोर्ड पर जमने लगती है. धीरे-धीरे सर्किटरी प्रभावित होती है और डिवाइस हैंग, क्रैश या अचानक बंद होने लगती है.
गलत एंगल पर टाइपिंग से स्क्रीन और हिंज टूटने का खतरा
बेड पर लैपटॉप रखते समय स्क्रीन का एंगल अक्सर सही नहीं रहता. समय के साथ स्क्रीन पर दबाव बढ़ता है और हिंज ढीले हो जाते हैं. इससे डिस्प्ले लाइनें पड़ने, स्क्रीन टूटने और हिंज रिपेयर पर हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं.
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लैपटॉप गिरने और लिक्विड डैमेज का बढ़ा जोखिम
बेड पर डिवाइस अस्थिर रहती है. थोड़ा-सा मूवमेंट या गलत पोजिशन बदलते ही लैपटॉप गिर सकता है. पानी की बोतल, चाय या कॉफी पास रखकर काम करना भी बड़ा खतरा है एक छींटा भी मदरबोर्ड को शॉर्ट कर सकता है.
कैसे बचाएं अपना लैपटॉप?
- लैपटॉप हमेशा फ्लैट टेबल पर रखें.
- कूलिंग पैड का इस्तेमाल करें.
- हर 6–12 महीने में लैपटॉप की सर्विस करवाएं.
- बेड पर काम करना हो तो लैपटॉप स्टैंड का उपयोग जरूर करें.
थोड़ी सी सावधानी आपकी महंगी मशीन को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकती है और आपको भारी खर्चे से बचा सकती है.