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क्या है रेटिनोब्लास्टोमा?
रेटिनोब्लास्टोमा आंख के पीछे मौजूद रेटिना में विकसित होने वाला एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है। यह बीमारी मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है और इसके ज्यादातर मामले तीन साल से कम उम्र में सामने आते हैं। समय रहते बीमारी की पहचान और इलाज होने पर कई मामलों में बच्चों के ठीक होने की संभावना काफी बेहतर रहती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।
आंख की पुतली में सफेद चमक हो सकती है पहला संकेत
रेटिनोब्लास्टोमा का प्रमुख शुरुआती संकेत आंख की पुतली में असामान्य सफेद चमक दिखाई देना है। सामान्य स्थिति में कैमरे की फ्लैश या तेज रोशनी में आंखों में लाल चमक दिखाई दे सकती है। लेकिन अगर किसी बच्चे की एक या दोनों आंखों में लाल चमक के बजाय सफेद चमक बार-बार दिखाई देती है, तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ऐसी स्थिति में बच्चे की आंखों की जांच जल्द कराना जरूरी है, क्योंकि समय पर जांच से बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है।
आंख का तिरछापन भी हो सकता है संकेत
आंख का बार-बार एक दिशा में मुड़ना या तिरछापन भी रेटिनोब्लास्टोमा के संभावित संकेतों में शामिल है। अगर बच्चा सामने देखते समय एक आंख को बार-बार अंदर या बाहर की ओर घुमाता है, तो इसे केवल सामान्य समस्या या ‘लेजी आई’ मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। कुछ मामलों में आंख का तिरछापन किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
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क्यों होता है रेटिनोब्लास्टोमा?
रेटिनोब्लास्टोमा एक आंख या दोनों आंखों में विकसित हो सकता है। इसके विकास में RB1 जीन में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ बच्चों में यह आनुवंशिक कारणों से हो सकता है, जबकि कई मामलों में जीन में बदलाव अपने आप विकसित होता है।
माता-पिता को क्या करना चाहिए?
बच्चे की आंखों में सफेद चमक, असामान्य निशान, लगातार तिरछापन या कोई अन्य बदलाव दिखाई दे तो इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द नेत्र रोग विशेषज्ञ या बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। शुरुआती जांच और समय पर इलाज गंभीर बीमारी के असर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ध्यान दें: आंखों में ऐसे लक्षण दिखने का मतलब हमेशा कैंसर होना नहीं है, लेकिन किसी भी असामान्य बदलाव की चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।