Rajasthan News : सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राज्यभर में नेशनल और स्टेट हाइवे से 500 मीटर के दायरे में मौजूद सभी शराब दुकानों को हटाने या दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट की चिंता भले ही सड़क सुरक्षा को लेकर जायज हो, लेकिन वह सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों की अनदेखी नहीं कर सकता।
पहली नजर में HC का फैसला गलत दिखता
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस पर अपना फैसला दिया है। न्यायमूर्ति ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के 2016 के ऐतिहासिक फैसले स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के. बालू में नगर निगम और स्थानीय निकाय इलाकों में मौजूद शराब दुकानों को हाईवे प्रतिबंध से छूट दी गई थी। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा पूरे राज्य में एकसाथ सभी दुकानों को हटाने का आदेश देना पहली नजर में गलत दिखाई देता है।
चुरू निवासियों ने कोर्ट में लगाई अर्जी
दरअसल, यह मामला चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे के दो निवासियों द्वारा 2023 में दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने हाईवे के पास शराब दुकानों की मौजूदगी को सड़क दुर्घटनाओं और नशे में ड्राइविंग का कारण बताया था। इस याचिका की सुनवाई के दौरान राजस्थान हाईकोर्ट ने पूरे राज्य में सड़क सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी। हाईकोर्ट ने 2025 में राज्य में नशे में वाहन चलाने के मामलों में बढ़ोतरी और हाल के दिनों में हुए कई खतरनाक एक्सीडेंट का हवाला दिया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 2016 के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि हाईवे किनारे शराब बिक्री सड़क सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
राज्य को मिलता है 2200 करोड़ का राजस्व
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर बताया था कि राजस्थान की कुल 7665 शराब दुकानों में से 1102 दुकानें हाईवे पर इसलिए स्थित हैं, क्योंकि वे नगर पालिका या स्थानीय निकाय की सीमा में आती हैं। सरकार ने यह भी कहा कि ये दुकानें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत प्रतिबंध से मुक्त हैं और इससे राज्य को सालाना 2200 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि नगर निकाय का दर्जा देकर हाईवे को छूट देना सड़क सुरक्षा के उद्देश्य को ही विफल करता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के 500 मीटर के भीतर स्थित शराब दुकानों को दो महीने में हटाने या स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
SC का फैसला, राज्य और निजी पक्ष की दलील
इस व्यापक आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और निजी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि उन्हें सुने बिना ही इतना बड़ा राज्यव्यापी आदेश पारित कर दिया गया। वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मूल मामला केवल सुजानगढ़ की सात दुकानों तक सीमित था, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे पूरे राज्य पर लागू कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए नोटिस जारी किया और कहा कि भविष्य में सड़क सुरक्षा को लेकर संतुलित और व्यावहारिक समाधान तलाशा जाना चाहिए।



