नई दिल्ली : राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने शुक्रवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह जारी की। आयोग ने कहा कि महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल देने के लिए हर साल पॉश ऑडिट कराना अनिवार्य किया जाए। इसके साथ ही, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने और शिकायतों के प्रभावी समाधान के लिए POSH कानून, 2013 के नियमों को सख्ती से लागू करने के कई सुझाव दिए गए हैं।
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एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष ने क्या कहा?
यह सलाह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को भेजी गई है। जमीनी स्तर पर प्रवर्तन और जवाबदेही के लिए इसे देश भर के जिला मजिस्ट्रेटों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को भी वितरित किया गया है। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया राहटकर ने कहा ‘किसी महिला को कभी भी अपनी गरिमा और आजीविका के बीच चुनाव नहीं करना चाहिए। हर कार्यस्थल सुरक्षा, सम्मान और समान अवसर का स्थान होना चाहिए।’
पॉश के नियम सख्ती से पालन हो
एक बयान में आयोग ने कहा कि इस सलाह का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक कार्यस्थल, चाहे वह सरकारी हो, निजी हो, संगठित हो या असंगठित क्षेत्र का हो, उत्पीड़न (कार्यस्थल पर महिलाओं का) रोकथाम (पॉश) अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन करे और महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और लिंग-संवेदनशील कार्य वातावरण को बढ़ावा दे। आगे कहा गया है कि संस्थागत जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पीओएसएच अधिनियम के कार्यान्वयन पर नज़र रखने के लिए समर्पित पीओएसएच निगरानी प्रकोष्ठ या डिजिटल अनुपालन डैशबोर्ड स्थापित करने की सलाह दी है।’ राज्यों से यह भी आग्रह किया गया है कि वे वरिष्ठ प्रशासनिक स्तरों पर समय-समय पर समीक्षा करें, क्षमता निर्माण को सुगम बनाएं, प्रतिष्ठानों और जिला अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन जारी करें और वैधानिक दायित्वों और न्यायिक निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें।
SHe-Box प्लेटफॉर्म के उपयोग का आकलन किया जाएगा
इस परामर्श में 10 या उससे अधिक व्यक्तियों को रोजगार देने वाले सभी प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य वार्षिक पॉश ऑडिट की सिफारिश की गई है। आयोग ने कहा कि ऑडिट में कानूनी अनुपालन, आंतरिक समितियों के कामकाज, शिकायतों की स्थिति, गोपनीयता सुरक्षा उपाय, कार्यस्थल सुरक्षा अवसंरचना, जागरूकता पहल, अनिवार्य खुलासे और SHe-Box प्लेटफॉर्म के उपयोग का आकलन किया जाएगा इसमें कहा गया है, ‘ऑडिट रिपोर्ट जिला अधिकारियों और संबंधित विभागों को प्रस्तुत की जानी है। ऑडिट न करना गैर-अनुपालन माना जाएगा।
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समिति का गठन कानून के अनुसार हो
इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि प्रत्येक आंतरिक समिति का गठन कानून के अनुसार ही किया जाना चाहिए, जिसमें एक महिला अध्यक्ष, योग्य सदस्य, एक बाहरी विशेषज्ञ और कम से कम 50 प्रतिशत महिला प्रतिनिधित्व होना चाहिए। जिला अधिकारियों को अनुपालन रिपोर्टों और लेखापरीक्षा निष्कर्षों की समीक्षा करने, गैर-अनुपालन करने वाले प्रतिष्ठानों की पहचान करने, आवधिक समीक्षा बैठकें आयोजित करने और जमीनी स्तर पर सतत कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए गहन पीओएसएच जागरूकता अभियान चलाने का कार्य सौंपा गया है।
आयोग के अनुसार, इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य केवल अनुपालन से आगे बढ़कर गरिमा, जवाबदेही और सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देना है, ताकि भारत में प्रत्येक कार्यस्थल महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सशक्त स्थान बन सके।


