RBSE : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर ने परीक्षा संबंधी दस्तावेज में संशोधन के नियमों में एक बार फिर बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार, अब वर्तनी, स्पेस, नाम, पिता जन्मतिथि से जुड़ी त्रुटियों का संशोधन तीन वर्ष पुराने प्रलेखों तक कराया जा सकेगा। बोर्ड ने 15 जून 2026 को जारी आदेश में संशोधन की सीमा घटाकर केवल एक वर्ष कर दी थी। इस फैसले का विद्यार्थियों और शिक्षा जगत में विरोध हुआ। इसके बाद बोर्ड ने संशोधित आदेश जारी कर एक माह तक पुराने मामलों में संशोधन का अवसर दिया, लेकिन इससे भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। बोर्ड में लगातार तीन वर्ष से अधिक पुराने मामलों के आवेदन आने पर बोर्ड ने आदेश में फिर संशोधन करते हुए अवधि बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी।
2001 से पहले के रिकॉर्ड में भी जोड़ा जा सकेगा माता का नाम
नए प्रावधान के अनुसार वर्ष 2001 से पहले के अभिलेखों में आवश्यक दस्तावेज के आधार पर माता का नाम जोड़ा जा सकेगा। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड और विद्यालय के रिकॉर्ड में नाम, उपनाम या जन्मतिथि में अंतर होने पर विद्यालय के रिकॉर्ड के आधार पर संशोधन किया जाएगा। यदि त्रुटि बोर्ड स्तर की होगी तो संशोधन निशुल्क किया जाएगा। अन्य मामलों में प्रति त्रुटि 300 रुपए शुल्क देना होगा।
बोर्ड के नए आदेश में ही दिखीं दो चूक
नया कार्यालय आदेश जारी होने के साथ ही उसमें दो स्पष्ट त्रुटियां भी सामने आई। आदेश के नीचे पहली पंक्ति में 15 जून 20026 अंकित है, जबकि वर्ष 2026 स्पष्ट रूप से टंकण त्रुटि है। इसके अलावा आदेश की तालिका के क्रमांक 4 में “विद्यालय पत्र एवं विद्यालय पत्र शब्दों की अनावश्यक पुनरावृत्ति भी दिखाई देती है। इससे आदेश के जल्दबाजी में तैयार होने के संकेत मिलते हैं।
आदेश और अंकतालिका में अलग-अलग नियम
बोर्ड के नए कार्यालय आदेश में संशोधन की अवधि तीन वर्ष तय की गई है, जबकि 2026 की पूरक परीक्षा की अंकतालिकाओं के पीछे छपे निर्देश अब भी पांच वर्ष तक संशोधन का प्रावधान बताते है। अंकतालिका के बिंदु-7 में लिखा है कि नाम, पिता या माता के नाम, उपनाम अथवा जन्मतिथि में परिणाम घोषित होने की तिथि से पांच वर्ष के भीतर संशोधन कराया जा सकता है। ऐसे में बोर्ड के नवीनतम आदेश और विद्यार्थियों को जारी दस्तावेजों के निर्देशों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आ गया है।
बोर्ड का विद्यार्थियों के हित में स्वागत योग्य निर्णय – मोहरसिंह सलावद
इधर, शिक्षक संघ रेसटा प्रदेशाध्यक्ष मोहरसिंह सलावद का कहना है कि दस्तावेज में संशोधन के नियमों में एक बार फिर बदलाव करते हुए नए कार्यालय आदेश के अनुसार अब विद्यार्थी तीन वर्ष पुराने प्रलेखों में वर्तनी, स्पेस, नाम, पिता का नाम, माता का नाम, उपनाम और जन्मतिथि से जुड़ी त्रुटियों का संशोधन करवा सकते है। ये बोर्ड का विद्यार्थियों के हित में स्वागत योग्य निर्णय है।


