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सुविधाओं के साथ पढ़ाई की गुणवत्ता भी जांचेंगे
निरीक्षण में तीसरी, छठवीं और नौवीं के बच्चों को केंद्र में रखा जाएगा। गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान समेत अन्य विषयों में उनकी समझ और दक्षता परखी जाएगी। टीम बच्चों से सीधे बातचीत भी करेगी। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि वे कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषय को कितना समझ रहे हैं।
निरीक्षण के बाद बनेगी सुधार की कार्ययोजना
राज्य स्तरीय टीम में विभागीय अधिकारियों के साथ विषय विशेषज्ञ, प्राचार्य, प्रधानपाठक और व्याख्याता शामिल होंगे। निरीक्षण के बाद स्कूलों को लाल या हरे रंग के संकेत के जरिए फीडबैक दिया जाएगा। इसके आधार पर जिला और विकासखंड स्तर के अधिकारियों की बैठक में सुधार की कार्ययोजना तैयार होगी। इसे आगे समग्र शिक्षा को भेजा जाएगा।
इन जिलों में भी निरीक्षण
दुर्ग के अलावा रायपुर, बिलासपुर, महासमुंद और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर का चयन पहले चरण के लिए किया गया है।
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तीन तरह के स्कूलों का होगा चयन
दुर्ग में उच्च प्रदर्शन, औसत और औसत से कम प्रदर्शन करने वाले स्कूलों को निरीक्षण में शामिल किया जाएगा। इससे अलग-अलग स्तर के स्कूलों में पढ़ाई की स्थिति का आकलन किया जा सकेगा। स्कूल की बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी देखी जाएगी। सरकारी स्कूलों में अब सिर्फ सुविधाओं ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के पढ़ाने के तरीके और बच्चों की सीखने की क्षमता की भी जमीनी जांच होगी। दुर्ग समेत पांच जिलों में होने वाले इस निरीक्षण के जरिए कमियों की पहचान कर स्कूलों के लिए सुधार की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।