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बचपन का सपना था डॉक्टर बनना
दिव्या के भाई साकेत मिश्रा ने बताया कि उनकी बहन के लिए डॉक्टर बनना महज एक करियर विकल्प नहीं, बल्कि बचपन से देखा हुआ सपना था. दिव्या तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं. जब वह पढ़ाई कर रही थीं, उसी दौरान पिता शैलेंद्र मिश्रा का असमय निधन हो गया. इसके बाद महज 20 साल की उम्र में दिव्या की शादी जैसीनगर निवासी मेडिकल संचालक प्रांजल द्विवेदी से कर दी गई.
NEET की तैयारी के लिए पहुंचीं भोपाल
शादी के बाद भी दिव्या के मन में डॉक्टर बनने की इच्छा जीवंत थी. उन्होंने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए पति और ससुराल वालों के समक्ष आगे की पढ़ाई और NEET की तैयारी करने की इच्छा जाहिर की. परिवार ने न केवल दिव्या की भावना को समझा, बल्कि उनका पूर्ण सहयोग करने का फैसला भी किया. पति प्रांजल ने दिव्या को NEET की तैयारी के लिए भोपाल भेजने का निर्णय लिया.
सास ने मां की तरह संभाली जिम्मेदारी
इस संघर्षपूर्ण सफर की सबसे खास बात यह रही कि दिव्या अकेले भोपाल नहीं गईं, बल्कि उनकी सास भी उनके साथ गईं. सास ने अपनी बहू की पढ़ाई को पूरे परिवार की जिम्मेदारी माना और उनका हर कदम पर सहयोग किया. दिव्या जब कोचिंग में पढ़ाई करती थीं, तब घर की तमाम जिम्मेदारियों को उनकी सास संभालती थीं. यहां तक कि वह अपनी बहू के लिए खुद टिफिन तैयार करके देती थीं, ताकि पढ़ाई के दौरान दिव्या को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो.
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तीन साल की बेटी
दिव्या की राह हालांकि इतनी आसान नहीं थी. डॉक्टर बनने की तैयारी के दौरान ही उन्हें मां बनने का सौभाग्य भी मिला. वर्तमान में उनकी एक तीन साल की बेटी है. पढ़ाई, कोचिंग, परिवार और मातृत्व की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना बेहद कठिन था, लेकिन दिव्या ने कभी हार नहीं मानी. पूरे परिवार ने उनका हौसला बनाए रखा और बच्ची की देखभाल में भी हर संभव मदद की.