नई दिल्ली: दिल्ली में DTC बस ड्राइवरों की हड़ताल का सीधा असर राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर पड़ा है। बसों का संचालन प्रभावित होने के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने दिल्ली मेट्रो का रुख किया। इसका असर मेट्रो की राइडरशिप पर भी देखने को मिला और गुरुवार को दिल्ली मेट्रो ने एक दिन में सबसे अधिक यात्रियों के सफर करने का नया रिकॉर्ड बनाया।
गुरुवार को कुल 82,44,903 यात्रियों ने दिल्ली मेट्रो से सफर किया। इससे पहले एक दिन में सबसे अधिक यात्रियों के सफर करने का रिकॉर्ड 8 अगस्त 2025 को दर्ज किया गया था। उस दिन 81,87,674 यात्रियों ने मेट्रो का इस्तेमाल किया था। इस तरह गुरुवार को करीब 57 हजार अधिक यात्रियों के सफर करने के साथ पुराना रिकॉर्ड टूट गया।
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बस हड़ताल के बीच मेट्रो बनी प्रमुख विकल्प
DTC बस ड्राइवरों की हड़ताल के कारण कई इलाकों में बस सेवाएं प्रभावित रहीं। ऐसे में यात्रियों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मेट्रो का सहारा लिया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के अनुसार, यात्रियों की संख्या में हुई बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारण DTC बसों का प्रभावित संचालन रहा।
यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए DMRC ने पहले से तैयारी की थी। गुरुवार को दिल्ली मेट्रो ट्रेनों ने 32 अतिरिक्त फेरे लगाए। इससे व्यस्त रूटों पर बढ़े यात्री दबाव को संभालने में मदद मिली। येलो और ब्लू लाइन के बाद पिंक लाइन पर भी यात्रियों की काफी भीड़ देखने को मिली।
लगातार चौथे दिन जारी रही ड्राइवरों की हड़ताल
DTC बस ड्राइवरों की हड़ताल शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रही। निजी कंपनियों के माध्यम से नियुक्त ड्राइवर वेतन बढ़ोतरी समेत अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इसके चलते राजधानी के कई हिस्सों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई और यात्रियों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा।
दिल्ली सरकार ने DTC में कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त उन ड्राइवरों की बसों में ड्यूटी लगाई, जो फिलहाल दूसरे कार्यों में तैनात थे। इसके बाद कुछ बसें सड़कों पर दिखाई दीं, लेकिन बड़ी संख्या में बसों का संचालन नहीं हो पाने के कारण यात्रियों की परेशानी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी।
बसों की कमी के बीच कई यात्रियों को ऑटो, कैब और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर ऑटो, कैब और ई-रिक्शा चालकों ने सामान्य से अधिक किराया वसूला।
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बवाना, नरेला और नजफगढ़ में ज्यादा असर
बाहरी दिल्ली के बवाना और नरेला तथा दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में बस सेवाओं के प्रभावित होने का ज्यादा असर देखने को मिला। बसें नहीं मिलने पर लोग मेट्रो, ऑटो और ई-रिक्शा के जरिए अपने गंतव्य तक पहुंचते नजर आए।
हड़ताल के दौरान कुछ DTC बसें सड़कों पर जरूर दिखाई दीं, लेकिन इनके आने में काफी समय लग रहा था। इसके कारण सभी यात्रियों को बसों में जगह नहीं मिल पा रही थी और उन्हें वैकल्पिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ा।
2,700 ड्राइवरों को बस संचालन में लगाया
DTC ने शुक्रवार को कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त करीब 2,700 ड्राइवरों को बस संचालन के लिए लगाया। ये ड्राइवर पहले दूसरे कार्यों में तैनात थे।
सामान्य दिनों में DTC करीब 550 रूटों पर 6,300 बसों का संचालन करता है। शुक्रवार को करीब 2,700 बसों को सड़क पर उतारने की कोशिश की गई। हालांकि, कुछ स्थानों पर हड़ताल कर रहे ड्राइवरों की ओर से बस संचालन में व्यवधान डालने की कोशिश किए जाने की बात भी सामने आई।
ई-रिक्शा और ऑटो का लेना पड़ा सहारा
बसों की कमी के कारण यात्रियों को ई-रिक्शा, ऑटो और RTV बसों पर निर्भर रहना पड़ा। लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन से मदर डेयरी, मंगलम अस्पताल और मयूर विहार की ओर जाने वाले यात्रियों को भी इन साधनों का सहारा लेते देखा गया।
यात्रियों के मुताबिक, कुछ ई-रिक्शा चालक दो से ढाई किलोमीटर की दूरी के लिए 15 से 20 रुपये तक किराया मांग रहे थे। बसों के लिए लंबा इंतजार करने के बजाय कई यात्रियों ने मजबूरी में ऑटो और ई-रिक्शा का विकल्प चुना।
इस तरह DTC बस ड्राइवरों की हड़ताल का असर जहां राजधानी की बस सेवा पर पड़ा है, वहीं इसका सीधा प्रभाव दिल्ली मेट्रो की राइडरशिप पर भी देखने को मिला है।


