लोन, इंश्योरेंस, नौकरी और अलग-अलग ऑफर्स के नाम पर आने वाली अनचाही कॉल्स से राजस्थान के कई शहरों के मोबाइल यूजर्स लंबे समय से परेशान हैं। TRAI के नए नियमों का उद्देश्य ऐसी कॉल्स पर नियंत्रण करना और टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना है।
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10 दिन में 5 नंबर फ्लैग होने पर शुरू होगी जांच
नए नियमों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति या संस्था से जुड़े 5 या उससे अधिक नंबर 10 दिनों के भीतर स्पैम के तौर पर फ्लैग होते हैं, तो टेलीकॉम कंपनियां जांच शुरू कर सकती हैं। जांच के दौरान दोबारा KYC, फिजिकल वेरिफिकेशन और आउटगोइंग सेवाओं पर रोक जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
बार-बार नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कनेक्शन बंद करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। वहीं, टेलीमार्केटर्स के मामले में संबंधित सभी नंबरों को एक साल तक डिस्कनेक्ट करने और ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है।
ऑटोमेटेड और रोबो कॉल्स पर लगेगा शुल्क
TRAI ने ऑटोमेटेड और रोबो कॉल्स को लेकर भी नियम सख्त किए हैं। ऐसी कॉल्स करने वाली कंपनियों को पहले से टेलीकॉम ऑपरेटर को इस्तेमाल किए जाने वाले नंबरों की जानकारी देनी होगी। बिना निर्धारित जानकारी के की गई कॉल्स को स्पैम माना जा सकता है।
ऐसी ऑटोमेटेड कॉल्स पर 5 पैसे प्रति मिनट का शुल्क लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, 140, 1600 और 1601 सीरीज के आधिकारिक नंबर इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।
AI सिस्टम से भी हो सकेगी नंबरों की पहचान
नए नियमों के तहत स्पैम की पहचान केवल उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर ही नहीं होगी। AI सिस्टम के जरिए भी नंबरों को फ्लैग किया जा सकेगा। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को शिकायत के निपटारे के खिलाफ 15 दिनों के भीतर अपील करने का विकल्प भी मिलेगा।
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राजस्थान के मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा?
नए प्रावधानों के लागू होने के बाद स्पैम कॉल करने वाले नंबरों की पहचान और उन पर कार्रवाई की प्रक्रिया मजबूत होने की उम्मीद है। इससे लोन, इंश्योरेंस, नौकरी और अन्य अनचाहे ऑफर्स के नाम पर आने वाली कॉल्स को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
TRAI के मुताबिक, इन बदलावों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को स्पैम से बचाना और टेलीकॉम नेटवर्क के दुरुपयोग को रोकना है। नियमों के प्रभावी होने से राजस्थान समेत देशभर के मोबाइल यूजर्स को अनचाही कॉल्स से राहत मिलने की उम्मीद है।