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याचिका में विश्वविद्यालय और पोद्दार इंस्टीट्यूट में लंबे समय से शिक्षकों के पद खाली रहने का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरडी रस्तोगी ने अदालत को बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय का प्रदेश और देश में महत्वपूर्ण स्थान रहा है। यहां से कई प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, न्यायाधीश, वैज्ञानिक और व्यवसायी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।
949 स्वीकृत पदों में करीब 383 शिक्षक कार्यरत
याचिका के अनुसार, 1 मई तक राजस्थान विश्वविद्यालय में शिक्षकों के कुल 949 पद स्वीकृत थे। इनमें 61 प्रोफेसर, 135 एसोसिएट प्रोफेसर और 753 सहायक प्रोफेसर के पद शामिल हैं।
इसके मुकाबले वर्तमान में करीब 383 शिक्षक ही नियुक्त बताए गए हैं। इनमें 2 प्रोफेसर, 19 एसोसिएट प्रोफेसर और 362 सहायक प्रोफेसर शामिल हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि लंबे समय से पद रिक्त रहने के कारण विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। साथ ही, शिक्षकों की कमी से शोध कार्य और नए पाठ्यक्रम शुरू करने में भी दिक्कत आने की बात कही गई है।
पोद्दार इंस्टीट्यूट में 9 पद, नियमित शिक्षक सिर्फ एक
पोड्डार इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट में भी शिक्षकों की कमी का मामला अदालत के सामने रखा गया। याचिका के मुताबिक, संस्थान में शिक्षकों के 9 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें केवल एक एसोसिएट प्रोफेसर नियमित रूप से नियुक्त है।
बाकी शिक्षण कार्य पार्ट टाइम और गेस्ट फैकल्टी के माध्यम से संचालित किए जाने का दावा याचिका में किया गया है। याचिकाकर्ता ने शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने और शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है।
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हाईकोर्ट ने इन पक्षों से मांगा जवाब
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रमुख उच्च शिक्षा सचिव, राजस्थान विश्वविद्यालय के चांसलर, कुलपति (वीसी) और पोद्दार इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से जवाब मांगा है।
अब संबंधित पक्षों की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।