Transgender IAS Journey : ओडिशा के कंधमाल जिले के कनाबागिरी गांव से शुरू हुआ ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान का सफर आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है। सामाजिक तानों, भेदभाव और कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने के बाद उन्होंने अपनी पहचान को स्वीकार किया और शिक्षा व मेहनत के दम पर प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया।
ऐश्वर्या की कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण से बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
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बचपन से ही चुनौतियों का सामना
ऐश्वर्या का जन्म रतिकंत प्रधान के रूप में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अपनी पहचान को लेकर सामाजिक दबाव और सवालों का सामना करना पड़ा। छठी कक्षा के दौरान उन्हें अपनी लैंगिक पहचान और भावनाओं को लेकर एक अलग तरह का एहसास हुआ।
हालांकि उस उम्र में अपनी बात को समझना और समाज के सामने उसे स्वीकार करना आसान नहीं था। स्कूल के दिनों में कई बार टिप्पणियों और सवालों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने पढ़ाई को कभी पीछे नहीं छोड़ा।
शिक्षा बनी आगे बढ़ने की ताकत
स्कूल के बाद ऐश्वर्या उच्च शिक्षा के लिए भुवनेश्वर पहुंचीं। यहां भी उनके सामने नई चुनौतियां आईं। पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान हॉस्टल जीवन में उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
इन परेशानियों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और इसके बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी की।
इस पूरे सफर में उनके परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। उनकी मां और बहन ने उनकी पहचान को स्वीकार किया और उन्हें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
2014 में बदली जिंदगी की दिशा
साल 2014 ऐश्वर्या के जीवन का अहम पड़ाव साबित हुआ। इसी दौरान उन्होंने अपनी पहचान को खुलकर स्वीकार करते हुए साड़ी पहनना शुरू किया। यह उनके लिए आत्मस्वीकृति और आत्मविश्वास का प्रतीक था।
शुरुआत में उन्हें लोगों के सवालों और प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे उनके आसपास के लोगों ने उनकी पहचान को स्वीकार करना शुरू किया। समय के साथ यही पहचान उनकी ताकत बन गई।
कमर्शियल टैक्स ऑफिसर से IAS तक
ऐश्वर्या ने प्रशासनिक क्षेत्र में भी अपनी जगह बनाई। वह ओडिशा फाइनेंशियल सर्विसेज में कमर्शियल टैक्स ऑफिसर के पद पर काम कर चुकी हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IAS अधिकारी बनने के बाद उन्होंने देश की पहली ट्रांसजेंडर IAS अधिकारी के रूप में पहचान हासिल की। उनका सफर केवल एक पद हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्षों के बीच अपने लक्ष्य पर कायम रहने की मिसाल है।
कनाबागिरी जैसे छोटे गांव से शुरू हुआ ऐश्वर्या का सफर अब उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म की पढ़ाई की.
उनके सफर में परिवार का साथ भी बेहद महत्वपूर्ण रहा. उनकी मां और बहन ने उनकी पहचान को स्वीकार करने और अपने सपनों की ओर आगे बढ़ने में उनका समर्थन किया.
2014: जब ऐश्वर्या ने खुद को खुलकर अपनाया
अप्रैल 2014 ऐश्वर्या की जिंदगी में एक अहम मोड़ लेकर आया. उन्होंने पुरुषों के कपड़े छोड़कर साड़ी पहनना शुरू किया. यह केवल पहनावे में बदलाव नहीं था. यह अपने अस्तित्व और पहचान को खुलकर स्वीकार करने का फैसला था. शुरुआत में लोगों की निगाहें बदलीं, सवाल उठे और स्वीकार्यता पाने में समय लगा. लेकिन ऐश्वर्या पीछे नहीं हटीं. धीरे-धीरे उनके सीनियर्स और साथियों ने भी उनकी पहचान को स्वीकार किया. जिस पहचान को कभी सवालों के घेरे में रखा गया था, वही पहचान आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई.
कमर्शियल टैक्स ऑफिसर से IAS तक
ऐश्वर्या ने प्रशासनिक सेवा में भी अपनी जगह बनाई. वह ओडिशा फाइनेंशियल सर्विसेज में कमर्शियल टैक्स ऑफिसर के रूप में कार्य कर चुकी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, IAS अधिकारी बनने के बाद उन्होंने देश की पहली ट्रांसजेंडर IAS अधिकारी के रूप में पहचान हासिल की. उनका सफर केवल एक प्रशासनिक पद तक पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष की कहानी है जिसमें एक इंसान ने सामाजिक पूर्वाग्रहों के बावजूद अपनी शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास को अपनी ताकत बनाया.
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ताने बहुत मिले… लेकिन जवाब कामयाबी ने दिया
ऐश्वर्या ऋतुपर्णा प्रधान की कहानी उस सोच को चुनौती देती है, जो किसी व्यक्ति की क्षमता को उसकी लैंगिक पहचान के आधार पर आंकती है. कनाबागिरी से शुरू हुआ यह सफर बताता है कि मंजिल तक पहुंचने के लिए रास्ता आसान होना जरूरी नहीं, हौसला मजबूत होना जरूरी है. स्कूल के अपमान से लेकर उच्च शिक्षा की चुनौतियों तक, अपनी पहचान स्वीकार करने से लेकर प्रशासनिक सेवा में मुकाम हासिल करने तक ऐश्वर्या ने हर पड़ाव पर एक बात साबित की:



