Pulwama Attack : आतंकवाद के इतिहास में 14 फरवरी 2019 का पुलवामा हमला देश की सामूहिक स्मृति पर गहरे घाव छोड़ गया. 22 वर्षीय आदिल अहमद डार द्वारा CRPF काफिले पर किए गए आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हुए और इसके बाद भारत की आतंकवाद-रोधी रणनीति में निर्णायक बदलाव आया. सात साल बाद, जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर आज भी फरार है, लेकिन उसकी गतिविधियों पर अंकुश लग चुका है. भारत की आक्रामक नीति ने उसे भूमिगत होने पर मजबूर कर दिया है.
भारत की बदली रणनीति: उरी से पुलवामा तक और आगे
उरी हमले के बाद शुरू हुई भारत की ‘स्ट्राइक बैक’ नीति पुलवामा के बाद और कठोर हुई. 2019 में भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश के ट्रेनिंग कैंप पर एयर स्ट्राइक कर आतंकी ढांचे को ध्वस्त किया. पहलगाम हमले के बाद भारत ने जैश के बहावलपुर मुख्यालय और लश्कर के मुरीदके ठिकानों पर 26 मिसाइलें दागकर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया. पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल आर. जे. रीन का कहना है कि उरी और पुलवामा के बाद भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसी भी आतंकी हमले का जवाब अब सीमा पार जाकर भी दिया जाएगा.
पुलवामा हमले की साजिश: अफगानिस्तान से ट्रेनिंग, स्थानीय नेटवर्क की भूमिका
NIA की 2020 में दायर चार्जशीट के अनुसार हमले की साजिश पाकिस्तान में जैश के नेतृत्व ने रची थी. मोहम्मद उमर फारूक, आतंकवादी इब्राहिम अतहर का बेटा और मसूद अजहर का भतीजा हमले का मुख्य मास्टरमाइंड था. उसने 2016–17 में अफगानिस्तान में ट्रेनिंग ली. अप्रैल 2018 में भारत में घुसपैठ की और स्थानीय मॉड्यूल तयार किया. 12 स्थानीय कश्मीरियों ने लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया. RDX पाकिस्तान से लाया गया, जबकि जिलेटिन स्टिक और एल्यूमिनियम पाउडर जैसी सामग्रियाँ स्थानीय स्तर पर जुटाईं गईं. हमले में इस्तेमाल की गई मारुति ईको कार सज्जाद अहमद भट के जरिए खरीदी गई थी.
NIA ने केस कैसे सुलझाया? एक मोबाइल फोन ने बदला पूरा खेल
जांच के शुरुआती दिनों में NIA के पास कोई ठोस सुराग नहीं था. मोड़ तब आया जब सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मारे गए उमर फारूक से दो क्षतिग्रस्त मोबाइल फोन बरामद किए. एक iPhone और एक Samsung S9+. तकनीकी जांच में जब डेटा रिकवर हुआ तो शाकिर बशीर के घर में खड़ी उसी नीली कार की तस्वीर मिली जो हमले में इस्तेमाल हुई. एक सेल्फी में आदिल डार और दो अन्य आतंकी चांदी रंग से चेहरा ढंके दिखे. वीडियो और तस्वीरों से इनशा जान और उसके पिता के घर में बनाई गई प्रोपेगेंडा वीडियो की पुष्टि हुई. एक पैकेट पर दिखे अमेज़न कंसाइनमेंट नंबर से वाइज-उल-इस्लाम की पहचान हुई, जिसने विस्फोटक सामग्री में इस्तेमाल होने वाला सामान खरीदा था. कुछ मीडिया फाइलों का लोकेशन टैग अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत के संगीन कैंप की ओर इशारा कर रहा था. आख़िरकार, NIA ने कड़ी तकनीकी और ग्राउंड जांच के बाद पूरी आतंकी साजिश की परतें उधेड़ दीं.
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चार्जशीट में शामिल आरोपी
NIA ने कुल 19 आरोपियों को सूचीबद्ध किया. इनमें से कुछ मारे गए, कुछ पाकिस्तान में छिपे हैं और कई गिरफ्तार किए जा चुके हैं. इसमें मसूद अजहर, रऊफ असगर, उमर फारूक जैसे बड़े नाम से लेकर शाकिर बशीर, इनशा जान, पीर तारिक अहमद शाह और वाइज-उल-इस्लाम जैसी स्थानीय सहायता प्रदान करने वाली कड़ियां शामिल हैं.
सात साल बाद तस्वीर कैसे बदली?
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद आतंक और अलगाववाद की जड़ें कमजोर हुई हैं. सीमा पार मौजूद आतंकी ढांचे को भारत की जवाबी कार्रवाइयों से भारी नुकसान पहुंचा है. पाकिस्तान अब पहले जैसा सुरक्षित ठिकाना आतंकियों को नहीं दे पा रहाय मसूद अजहर जैसे चरमपंथी नेताओं के लिए भी हालात कठिन हो गए हैं.


