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सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस की बर्बर कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग दिखाई देता है। आरोप है कि एक वायरल वीडियो में एक महिला प्रदर्शनकारी के साथ एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा मारपीट की गई। इन कथित वायरल वीडियो को लेकर विपक्षी दलों और आंदोलनकारियों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं तथा सरकार पर छात्र आंदोलन को बलपूर्वक दबाने का आरोप लगाया है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे Cockroach Janta Party (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी टीम ने घोषणा की है कि जब तक छात्रों की मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक वर्तमान में धरना स्थल पर मौजूद नहीं हैं।
आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने नई दिल्ली क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू की, संसद और प्रधानमंत्री आवास के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया, कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की, सुरक्षा कारणों से कई मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किया तथा बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों और छात्र नेताओं को हिरासत में लिया।
कल शाम आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया। पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत अनेक विपक्षी नेताओं को हिरासत में ले लिया। जिन्हें बाद में रिहा कर दिया गया l
उधर, इस पूरे घटनाक्रम की गूंज लगातार दूसरे दिन संसद के दोनों सदनों में भी सुनाई दी। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया, जिसके चलते कई बार कार्यवाही बाधित हुई। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
सरकार की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों में जांच जारी है, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है ।
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फिलहाल आंदोलनकारी अपने रुख पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली का यह छात्र आंदोलन अब केवल शिक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बन चुका है।
इन सभी के बीच जरूरी है कि सरकार और आंदोलनकारी दोनों हिंसा और दमन से दूर रहते हुए लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें जिससे शांति व्यवस्था बनी रहे । लोग अफवाहों से बचें और सोशल मीडिया पर सावधान रहें ।